विदेश मंत्री एस जयशंकर सोमवार को दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर मंगोलिया पहुंचे। इस यात्रा को भारत और मंगोलिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। ऊर्जा सुरक्षा, खनन और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति इस दौरे के प्रमुख एजेंडों में शामिल हैं।

मंगोलिया दुनिया के सबसे खनिज संपन्न देशों में गिना जाता है। यहां यूरेनियम, तांबा, सोना, कोयला और रेयर अर्थ मिनरल्स के विशाल भंडार मौजूद हैं। ऐसे में भारत की नजर अब मंगोलिया के प्राकृतिक संसाधनों पर है, जो भविष्य में देश की ऊर्जा और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

यूरेनियम का विशाल भंडार, भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मिल सकता है सहारा

मंगोलिया में लगभग 1.92 लाख टन यूरेनियम संसाधन होने का अनुमान है, जिसे दुनिया के सबसे बड़े अविकसित यूरेनियम भंडारों में गिना जाता है। हालांकि अभी वहां व्यावसायिक स्तर पर खनन शुरू नहीं हुआ है, लेकिन वर्ष 2028 तक अंतरराष्ट्रीय निवेश के जरिए उत्पादन शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। भारत अपने नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए यूरेनियम आयात पर निर्भर है। ऐसे में मंगोलिया के साथ दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते भारत की ऊर्जा जरूरतों को मजबूती दे सकते हैं।

तांबा और सोने का भी खजाना

मंगोलिया में 5.6 करोड़ टन से अधिक तांबे का भंडार मौजूद है। दक्षिण गोबी क्षेत्र स्थित ओयु तोलगोई खदान दुनिया के सबसे बड़े तांबा और सोना भंडारों में शामिल है। इसके अलावा गैत्सुर्ट, बोरो और जामार क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सोने का उत्पादन किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहन, सौर ऊर्जा और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में तांबे की बढ़ती मांग के बीच मंगोलिया भारत के लिए महत्वपूर्ण साझेदार बन सकता है।

रेयर अर्थ और लिथियम पर भी भारत की नजर

मंगोलिया में करीब 31 लाख टन रेयर अर्थ मिनरल्स के भंडार होने का अनुमान है। इसके अलावा लिथियम, फ्लोर्सपार, जिंक और लौह अयस्क की भी प्रचुर उपलब्धता है। ये खनिज बैटरी, रक्षा उपकरण, सेमीकंडक्टर और हाई-टेक उद्योगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

भारत-मंगोलिया संबंधों को मिलेगा नया आयाम

जयशंकर ने मंगोलिया पहुंचने पर कहा कि भारत एक करीबी पड़ोसी और आध्यात्मिक साझेदार के रूप में मंगोलिया के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। माना जा रहा है कि इस दौरे के दौरान खनन, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। मंगोलिया दौरे के बाद विदेश मंत्री दक्षिण कोरिया रवाना होंगे, जहां वह द्विपक्षीय वार्ता के साथ-साथ जेजू फोरम में भी हिस्सा लेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *