बरेली। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने देशभर के मुसलमानों से मोहर्रम के जुलूसों को लेकर अहम अपील की है। उन्होंने कहा कि मोहर्रम हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी, सब्र और इंसाफ के पैगाम को याद करने का महीना है। ऐसे में जुलूसों में दिखावे, प्रतिस्पर्धा और शोर-शराबे से बचना चाहिए। धार्मिक आयोजनों को सादगी, अनुशासन और शांति के साथ संपन्न कराना ही असली अकीदत है।
मौलाना शहाबु्द्दीन रजवी ने जुलूसों में डीजे के इस्तेमाल पर सख्त आपत्ति जताते हुए कहा कि यह मोहर्रम की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर जुलूसों में तेज आवाज वाले डीजे लगाए जाते हैं, जिससे धार्मिक माहौल प्रभावित होता है। डीजे की कर्कश ध्वनि से बुजुर्गों, बच्चों और हृदय रोगियों को गंभीर परेशानी होती है। कई बार अत्यधिक शोर के कारण स्वास्थ्य संबंधी घटनाएं भी सामने आई हैं। उन्होंने अंजुमनों और आयोजकों से अपील की कि वे किसी भी कीमत पर डीजे को जुलूस का हिस्सा न बनने दें।
दिखावे की प्रतिस्पर्धा से पैदा होते हैं विवाद
उन्होंने कहा कि मोहर्रम का संदेश त्याग और इंसानियत का है, लेकिन कुछ जगहों पर ताजियों और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर अनावश्यक प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है। यही होड़ कई बार सामाजिक तनाव और विवाद की वजह बन जाती है। धार्मिक आयोजनों को प्रतिष्ठा का विषय बनाने के बजाय उन्हें इबादत और याद-ए-हुसैन का माध्यम बनाया जाना चाहिए। समाज के जिम्मेदार लोगों को आगे आकर युवाओं को भी इस दिशा में जागरूक करना चाहिए।
अमन-चैन के साथ निकले जुलूस, यही है सबसे बड़ी जिम्मेदारी
मौलाना रजवी ने कहा कि मोहर्रम के दौरान सभी अंजुमनें प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करें और ऐसे किसी भी कार्य से बचें, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो। उन्होंने कहा कि देश की गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे को मजबूत करना समय की जरूरत है। मोहर्रम के जुलूस शांति, अनुशासन और सम्मान के साथ निकलें, यही हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे मोहर्रम को धार्मिक गरिमा, सामाजिक जिम्मेदारी और इंसानी मूल्यों के साथ मनाएं।