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बरेली। बुधवार रात आई तेज आंधी और मूसलाधार बारिश ने बरेली स्मार्ट सिटी के दावों की हकीकत सामने ला दी। शहर से लेकर देहात तक बिजली व्यवस्था चरमरा गई, जबकि कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। बिजली आपूर्ति ठप होने से पेयजल संकट भी गहरा गया और लोगों को पानी के लिए हैंडपंपों व जनरेटर का सहारा लेना पड़ा। रातभर उपभोक्ता गर्मी, अंधेरे और पानी की किल्लत से जूझते रहे।

तेज हवाओं और बारिश के चलते शहर के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। कई स्थानों पर पेड़ और टहनियां बिजली लाइनों पर गिरने से फॉल्ट उत्पन्न हुए, जिसके कारण घंटों तक आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। बिजली कटौती का असर सीधे जलापूर्ति व्यवस्था पर पड़ा। नगर निगम और जलकल विभाग के ट्यूबवेल प्रभावित होने से गुरुवार सुबह कई मोहल्लों में नलों से पानी नहीं पहुंच सका।

निचले इलाकों में भरा बारिश का पानी

बारिश के बाद शहर के निचले इलाकों और कई कॉलोनियों की सड़कें तालाब में तब्दील नजर आईं। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने और नालों की सीमित क्षमता के कारण बारिश का पानी घंटों तक जमा रहा। इससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई दोपहिया वाहन जलभराव वाले क्षेत्रों में फंस गए, जबकि पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया। बिजली संकट के कारण पेयजल व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई। सुबह पानी न मिलने पर लोगों को हैंडपंपों पर कतार लगानी पड़ी। जिन घरों में जनरेटर की सुविधा थी, वहां मोटर चलाकर पानी की जरूरत पूरी की गई, लेकिन अधिकांश परिवारों को पानी के लिए भटकना पड़ा। कई इलाकों में लोगों ने निजी स्तर पर पानी की व्यवस्था करने की कोशिश की।

बिजली गुल, ट्यूबवेल बंद, पानी के लिए भटके लोग

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर साल मानसून से पहले नाला सफाई, ड्रेनेज सुधार और जल निकासी को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली तेज बारिश में ही व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति सामने आ जाती है। करोड़ों रुपये की स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के बावजूद जलभराव और पेयजल संकट जैसी मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं हो सका है। एक ओर प्रशासन स्मार्ट सिटी और आधुनिक सुविधाओं के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ घंटों की बारिश और बिजली कटौती ने पूरे सिस्टम की कमजोरियां उजागर कर दीं। नागरिकों का कहना है कि यदि मानसून की शुरुआत में ही यह हाल है तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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