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बरेली। स्मार्ट सिटी की फूड कोर्ट परियोजना अब सीधे मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत में करोड़ों रुपये की सरकारी धनराशि के दुरुपयोग, नियमों की अनदेखी और जमीन की लीज प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की विजिलेंस, ईओडब्ल्यू या ईडी से जांच कराने की मांग की है।

शिकायतकर्ता अधिवक्ता चन्द्र प्रकाश का आरोप है कि डीडीपुरम स्थित कुष्ठ आश्रम की करीब 1100 वर्गमीटर भूमि पर स्ट्रीट वेंडरों के लिए 67 टीन शेड दुकानों का निर्माण कराया गया था। इस परियोजना पर करीब 3.02 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन एक भी स्ट्रीट वेंडर को दुकान आवंटित नहीं की गई। आरोप है कि करीब 18 महीने बाद उन्हीं शेडों को ध्वस्त कर दिया गया।

अब 15 साल की लीज पर दी गई जमीन

शिकायत में दावा किया गया है कि जिन दुकानों पर करोड़ों रुपये खर्च हुए, उसी भूमि को बाद में एक निजी संस्था को 15 वर्ष की लीज पर दे दिया गया। इससे सरकारी धन की बर्बादी और निर्णय प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि परियोजना के लिए नगर निगम बोर्ड से आवश्यक स्वीकृति नहीं ली गई और न ही बीडीए से मानचित्र पास कराया गया। शिकायतकर्ता ने इन बिंदुओं की भी जांच कराने की मांग की है।

फूड कोर्ट से कॉम्प्लेक्स तक का सफर जांच के घेरे में

शिकायतकर्ता का आरोप है कि अब उसी जमीन पर व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कॉम्प्लेक्स विकसित किया जा रहा है और दुकानों को प्रीमियम व किराये पर देने की तैयारी है। साथ ही लीज प्रक्रिया में सरकारी हितों को नुकसान पहुंचाने का भी दावा किया गया है। मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत में परियोजना पर तत्काल रोक लगाने, निर्माण की वैधता की जांच कराने और पूरे मामले को विजिलेंस, ईओडब्ल्यू अथवा ईडी जैसी एजेंसियों को सौंपने की मांग की गई है। शिकायत सामने आने के बाद स्मार्ट सिटी परियोजना की कार्यप्रणाली को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, संबंधित विभागों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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