बरेली। बदलते दौर में सिर्फ पारंपरिक डिग्री नौकरी की गारंटी नहीं रही। ऐसे समय में महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने छात्रों के लिए ऐसा अवसर उपलब्ध कराया है, जो उनके करियर को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला सकता है। विश्वविद्यालय ने जर्मन, फ्रेंच, स्पैनिश और मंदारिन जैसी विदेशी भाषाओं के पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन भाषाओं का ज्ञान छात्रों को देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी रोजगार के नए अवसर उपलब्ध करा सकता है।
विश्वविद्यालय परिसर स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मल्टीलिंगुअल स्टडीज (COEMS) में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और स्नातकोत्तर स्तर के विभिन्न पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। कुलपति प्रो. के.पी. सिंह के मार्गदर्शन में शुरू की गई यह पहल नई शिक्षा नीति और वैश्विक रोजगार बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
जर्मन-फ्रेंच सीखते ही खुलेंगे मल्टीनेशनल कंपनियों के दरवाजे
विशेषज्ञों के अनुसार जर्मन, फ्रेंच, स्पैनिश और मंदारिन जैसी भाषाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। आईटी सेक्टर, पर्यटन उद्योग, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, एयरलाइंस, दूतावास, अनुवाद सेवाओं और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में इन भाषाओं के जानकार युवाओं को प्राथमिकता दी जाती है। यही वजह है कि विदेशी भाषा अब केवल शौक नहीं, बल्कि करियर का मजबूत हथियार बन चुकी है।
एक साथ दो कोर्स, करियर को मिलेगा डबल फायदा
नई शिक्षा नीति के तहत छात्रों को अपने मुख्य विषय के साथ विदेशी भाषा का अध्ययन करने की सुविधा भी दी जा रही है। इससे विद्यार्थी डिग्री के साथ एक अतिरिक्त प्रोफेशनल स्किल हासिल कर सकेंगे। विश्वविद्यालय का मानना है कि यह व्यवस्था युवाओं की रोजगार क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मक योग्यता को नई ऊंचाई देगी।
12वीं पास से लेकर ग्रेजुएट तक के लिए मौका
विश्वविद्यालय में कम्युनिकेटिव स्किल्स और इंग्लिश फॉर बिजनेस जैसे सर्टिफिकेट कोर्स भी उपलब्ध हैं। विदेशी भाषा के डिप्लोमा और सर्टिफिकेट पाठ्यक्रमों के लिए 12वीं पास छात्र आवेदन कर सकते हैं, जबकि एम.ए. फंक्शनल हिन्दी और एम.ए. पाली जैसे पाठ्यक्रमों के लिए स्नातक होना अनिवार्य है।
15 जून तक कर सकेंगे आवेदन
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार सभी पाठ्यक्रम नाममात्र शुल्क पर उपलब्ध हैं। इच्छुक छात्र-छात्राएं 15 जून तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। करियर को वैश्विक पहचान देने और रोजगार की नई संभावनाओं से जुड़ने के इच्छुक युवाओं के लिए यह अवसर किसी सुनहरे भविष्य के पासपोर्ट से कम नहीं माना जा रहा।