लखनऊ। भीषण गर्मी के बीच उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। महाराष्ट्र के बाद अब यूपी देश का दूसरा सबसे ज्यादा बिजली खपत वाला राज्य बन गया है। बढ़ती मांग के चलते बिजली व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ रहा है और इसका असर सबसे ज्यादा ग्रामीण इलाकों में दिखाई दे रहा है, जहां रोजाना घंटों बिजली कटौती हो रही है।
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में बिजली संकट और बढ़ती मांग को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के आंकड़ों के मुताबिक 20 से 22 मई के बीच राज्य में लगातार रिकॉर्ड बिजली मांग दर्ज हुई।
30 हजार मेगावाट से ऊपर पहुंची मांग
22 मई को उत्तर प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 30,476 मेगावाट दर्ज की गई। यह आंकड़ा महाराष्ट्र के बाद देश में दूसरा सबसे बड़ा रहा। अधिकारियों का कहना है कि जून में तापमान और बढ़ने के साथ बिजली की मांग और ऊपर जा सकती है।
गांवों में 6-7 घंटे तक कटौती
बढ़ती मांग और उत्पादन संकट के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भारी बिजली कटौती की जा रही है। 15 से 22 मई के बीच कई इलाकों में रोजाना 4 से 7 घंटे तक बिजली गुल रही। सबसे ज्यादा संकट 20 मई को सामने आया, जब 4,529 मेगावाट तक की कमी दर्ज की गई। ग्रामीण उपभोक्ताओं का कहना है कि भीषण गर्मी में लंबे कट से पानी की सप्लाई, खेती और घरेलू कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
11 थर्मल पावर प्लांट बंद होने से बढ़ा संकट
UPPCL के मुताबिक इस संकट की बड़ी वजह राज्य और निजी क्षेत्र के कई थर्मल पावर प्लांट्स का बंद होना है। घाटमपुर, ललितपुर, ओबरा, अनपरा और जवाहरपुर जैसे बड़े प्लांट्स की कई यूनिट्स रखरखाव और तकनीकी कारणों से बंद चल रही हैं। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि उत्पादन क्षमता और ट्रांसमिशन सिस्टम पर लंबे समय से पर्याप्त निवेश नहीं हुआ, जिसकी वजह से गर्मी बढ़ते ही संकट गहराने लगा।
दूसरे राज्यों से ली जा रही बिजली
बिजली संकट से निपटने के लिए यूपी सरकार ने कई राज्यों के साथ पावर बैंकिंग व्यवस्था की है। कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु समेत कई राज्यों से बिजली ली जा रही है। इसके अलावा पीक आवर्स में अतिरिक्त बिजली खरीदने की भी तैयारी की जा रही है। ऊर्जा विभाग का दावा है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और बंद यूनिट्स को जल्द चालू करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि आने वाले हफ्तों में सप्लाई व्यवस्था बेहतर की जा सके।