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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में बड़ा प्रशासनिक बदलाव होने जा रहा है। प्रदेश के करीब 57 हजार से ज्यादा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 25 मई को खत्म हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद गांवों की सत्ता उन्हीं के हाथों में बनी रहेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंचायतीराज विभाग के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत मौजूदा ग्राम प्रधान पंचायत चुनाव होने तक “प्रशासक” बनकर ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी संभालेंगे। सरकार के इस फैसले ने ग्रामीण राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।

पहली बार लागू होगी नई व्यवस्था

अब तक परंपरा यह रही थी कि ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद एडीओ पंचायत या प्रशासनिक अधिकारी को प्रशासक बनाया जाता था, लेकिन इस बार सरकार ने नया मॉडल अपनाया है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड की तर्ज पर यूपी में भी मौजूदा प्रधानों को ही पंचायतों की कमान सौंपने की तैयारी की गई है। सरकार का तर्क है कि गांवों में चल रहे विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए यह फैसला जरूरी था। यदि पंचायतों की जिम्मेदारी अचानक किसी बाहरी अधिकारी को दी जाती तो सड़क, नाली, आवास, पेयजल और अन्य योजनाओं पर असर पड़ सकता था।

पंचायत चुनाव में देरी बनी वजह

सूत्रों के मुताबिक पंचायत चुनाव 2027 विधानसभा चुनाव के बाद कराए जा सकते हैं। मतदाता सूची का काम, आयोग की प्रक्रियाएं और हाईकोर्ट में चल रहे मामलों के चलते चुनाव में देरी मानी जा रही है। अंतिम मतदाता सूची 10 जून तक जारी होने की संभावना बताई जा रही है। यही वजह है कि सरकार ने गांवों में प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखने के लिए वर्तमान प्रधानों को ही प्रशासक बनाने का फैसला लिया। माना जा रहा है कि यह व्यवस्था करीब एक साल तक चल सकती है।

प्रधान संगठनों में खुशी, विपक्ष की नजर

सरकार के फैसले के बाद ग्राम प्रधान संगठनों में खुशी का माहौल है। राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संघ लंबे समय से यही मांग उठा रहा था कि चुनाव तक वर्तमान प्रधानों को ही जिम्मेदारी दी जाए। संघ का कहना है कि गांवों की समस्याओं और योजनाओं की बेहतर जानकारी मौजूदा प्रधानों को ही होती है। वहीं राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि इस फैसले का असर ग्रामीण राजनीति और आने वाले विधानसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है। प्रधानों का गांवों में प्रभाव बरकरार रहने से स्थानीय राजनीतिक समीकरण मजबूत होंगे। विपक्ष भी सरकार के इस फैसले पर नजर बनाए हुए है।

गांवों में जारी रहेंगे विकास कार्य

सरकार का दावा है कि प्रशासक व्यवस्था लागू होने के बाद गांवों में विकास कार्यों की रफ्तार नहीं रुकेगी। सरकारी योजनाओं का संचालन पहले की तरह चलता रहेगा और पंचायत स्तर पर प्रशासनिक स्थिरता बनी रहेगी। फिलहाल पंचायत चुनाव भले टल गए हों, लेकिन गांवों की राजनीति अब और ज्यादा गर्म होती नजर आ रही है।

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