लखनऊ। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। पिछले दस दिनों में चौथी बार ईंधन के दाम बढ़ने से वाहन चालकों से लेकर व्यापारियों तक में चिंता बढ़ गई है। तेल कंपनियों की ओर से जारी नई दरों के बाद लखनऊ मंडल के कई जिलों में पेट्रोल 102 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गया है, जबकि डीजल भी तेजी से महंगा हो रहा है।
लगातार बढ़ रही कीमतों से बढ़ा आर्थिक दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर दिखाई देने लगा है। तेल कंपनियों ने पेट्रोल में करीब 2.61 रुपये और डीजल में 2.72 रुपये तक की बढ़ोतरी की है। लगातार बढ़ रहे दामों से नौकरीपेशा, मध्यम वर्ग और रोजाना वाहन इस्तेमाल करने वाले लोगों का बजट बिगड़ता जा रहा है।
लखनऊ में पेट्रोल 101 रुपये के पार
राजधानी लखनऊ में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 101.89 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है, जबकि डीजल 95.36 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वाहन चालकों का कहना है कि रोजाना ऑफिस आने-जाने का खर्च तेजी से बढ़ रहा है। कई लोग अब निजी वाहन छोड़कर सार्वजनिक परिवहन का सहारा लेने की बात कह रहे हैं।
मंडल के जिलों में नई कीमतें
- लखनऊ — पेट्रोल ₹101.89, डीजल ₹95.36
- उन्नाव — पेट्रोल ₹101.72, डीजल ₹95.18
- रायबरेली — पेट्रोल ₹102.14, डीजल ₹95.61
- सीतापुर — पेट्रोल ₹102.28, डीजल ₹95.74
- हरदोई — PETROL ₹101.95, डीजल ₹95.43
- लखीमपुर खीरी — पेट्रोल ₹102.36, डीजल ₹95.82
ट्रांसपोर्ट से लेकर बाजार तक असर
ईंधन महंगा होने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से फल-सब्जी, दूध, राशन और रोजमर्रा के सामान भी महंगे होने लगते हैं। व्यापारियों का कहना है कि माल ढुलाई का खर्च बढ़ने से बाजार में कीमतें और बढ़ सकती हैं।
सोशल मीडिया पर बढ़ रही नाराजगी
लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। सोशल मीडिया पर लोग सरकार और तेल कंपनियों के खिलाफ प्रतिक्रिया दे रहे हैं। आम लोगों का कहना है कि पहले से बढ़ी महंगाई के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।
तेल कंपनियों ने बताई वजह
सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक परिस्थितियों के कारण घरेलू बाजार में दाम बढ़ाने पड़े हैं। कंपनियों के मुताबिक डॉलर की कीमत और वैश्विक मांग का असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।