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सहारनपुर/शामली। Iqra Hasan के खिलाफ सड़क जाम, प्रदर्शन और पुलिस कार्य में बाधा डालने के आरोप में मुकदमा दर्ज होने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कैराना सांसद समेत सात लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 20 से 25 अज्ञात समर्थकों को भी आरोपी बनाया गया है। मामला DIG कार्यालय के बाहर हुए हंगामे से जुड़ा है, जहां मोनू कश्यप हत्याकांड को लेकर बड़ी संख्या में समर्थक पहुंच गए थे।

मोनू कश्यप हत्याकांड को लेकर पहुंची थीं सांसद

पूरा घटनाक्रम 19 मई का बताया जा रहा है। जसाला गांव निवासी मोनू कश्यप की मौत के मामले में पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा था। इसी सिलसिले में सांसद इकरा हसन मृतक की मां के साथ DIG अभिषेक सिंह से मिलने पहुंचीं। परिजनों ने हत्या की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग रखी। सांसद का आरोप है कि बातचीत के दौरान अधिकारियों का रवैया संवेदनशील नहीं था, जिससे मृतक की मां भावुक होकर रोने लगीं। इसके बाद माहौल अचानक गर्मा गया और समर्थकों की भीड़ DIG कार्यालय के बाहर जमा हो गई।

सड़क पर भीड़, पुलिस बोली- यातायात हुआ प्रभावित

पुलिस के मुताबिक बड़ी संख्या में समर्थकों के इकट्ठा होने से सड़क पर अवरोध की स्थिति बन गई। यातायात प्रभावित हुआ और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। इसी दौरान सांसद और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने सांसद इकरा हसन को हिरासत में लेकर महिला थाने भेज दिया। हालांकि कुछ देर बाद उन्हें छोड़ दिया गया। वहीं कई समर्थकों को शांतिभंग की धाराओं में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

कोतवाली में धरना, फिर दर्ज हुआ मुकदमा

घटना के बाद समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं ने सदर बाजार कोतवाली में धरना शुरू कर दिया। इसके बाद उप निरीक्षक संजय कुमार शर्मा की तहरीर पर FIR दर्ज की गई। मुकदमे में सांसद इकरा हसन के अलावा पूर्व राज्यमंत्री मांगेराम कश्यप, तेजपाल सिंह, अजय, अनुज, शीशपाल और सत्यपाल को नामजद किया गया है। साथ ही 20 से 25 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।

क्या है मोनू कश्यप मर्डर केस?

मोनू कश्यप का शव 21 अप्रैल को पंजोखरा क्षेत्र में रेलवे लाइन के पास मिला था। पुलिस जांच में सामने आया कि दो युवकों ने कथित तौर पर प्रेम प्रसंग को लेकर विवाद के बाद मोनू को पार्टी के बहाने बुलाया, शराब पिलाई और फिर ट्रेन के आगे धक्का दे दिया। पुलिस दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

FIR के बाद और गरमाई राजनीति

इस मामले में FIR दर्ज होने के बाद सपा और प्रशासन आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। विपक्ष इसे जनप्रतिनिधि की आवाज दबाने की कार्रवाई बता रहा है, जबकि पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने की बात कह रही है। अब पूरे मामले पर प्रदेश की राजनीति की नजर टिक गई है।

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