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नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के राफेल लड़ाकू विमान अब पहले से कहीं ज्यादा घातक और हाईटेक बनने जा रहे हैं। भारत और फ्रांस के बीच राफेल के F4+ वैरिएंट को लेकर चल रही बातचीत में कई बड़े तकनीकी मुद्दों पर सहमति बनने की खबर है। माना जा रहा है कि नए अपग्रेड के बाद भारतीय राफेल सिर्फ विदेशी फाइटर जेट नहीं रहेगा, बल्कि पूरी तरह भारतीय सैन्य नेटवर्क से जुड़ी एक आधुनिक युद्ध प्रणाली बन जाएगा।

स्टील्थ फाइटर्स को ट्रैक करने में होगी महारत

रिपोर्ट्स के मुताबिक राफेल F4+ को खासतौर पर चीन के J-20 जैसे स्टील्थ फाइटर जेट्स का मुकाबला करने के लिए तैयार किया जा रहा है। इसके सेंसर, रडार प्रोसेसिंग सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीक को इस तरह अपग्रेड किया जाएगा कि छिपे हुए टारगेट्स की पहचान आसान हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अपग्रेड भारतीय वायुसेना को चीन और पाकिस्तान के खिलाफ बड़ी रणनीतिक बढ़त दे सकता है।

भारतीय मिसाइल और सैटेलाइट सिस्टम से होगा सीधा कनेक्शन

राफेल F4+ को भारतीय जरूरतों के हिसाब से कस्टमाइज किया जा रहा है। इसमें भारतीय मिसाइलें, सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम और IACCS एयर डिफेंस नेटवर्क को सीधे जोड़ा जाएगा। यानी भविष्य में युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना को विदेशी सिस्टम पर कम निर्भर रहना पड़ेगा और ऑपरेशन ज्यादा तेजी और सटीकता से किए जा सकेंगे।

सोर्स कोड विवाद भी हो सकता है खत्म

राफेल डील में सबसे बड़ा मुद्दा हमेशा सोर्स कोड और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सिस्टम को लेकर रहा है। अब खबर है कि फ्रांस भारत को ऐसा विशेष आर्किटेक्चर देने पर विचार कर रहा है, जिससे भारतीय वायुसेना अपनी “थ्रेट लाइब्रेरी” खुद तैयार कर सकेगी। इससे भारत चीनी और पाकिस्तानी रडार सिग्नेचर को अपने स्तर पर ट्रैक और वर्गीकृत कर पाएगा। रक्षा विशेषज्ञ इसे इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के क्षेत्र में बड़ी रणनीतिक आजादी मान रहे हैं।

हिमालयी मिशन के लिए तैयार होगा नया राफेल

बताया जा रहा है कि भारतीय राफेल F4+ को खास तौर पर हिमालयी और हाई एल्टीट्यूड मिशनों के लिए भी तैयार किया जाएगा। इसमें लंबी दूरी के स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक और मल्टी-लेयर एयर डिफेंस को ध्यान में रखकर बदलाव किए जा रहे हैं। फ्रांस का मूल F4 मॉडल NATO नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली पर केंद्रित है, लेकिन भारतीय संस्करण को दक्षिण एशिया के युद्ध हालात और क्षेत्रीय खतरों के मुताबिक तैयार किया जा रहा है।

रक्षा क्षेत्र में भारत को मिलेगी नई ताकत

रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि अगर यह डील पूरी तरह लागू होती है तो भारतीय वायुसेना को भविष्य के युद्धों में बड़ी तकनीकी बढ़त मिल सकती है। खासतौर पर स्टील्थ फाइटर डिटेक्शन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और नेटवर्क आधारित युद्ध में भारत की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

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