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बिजनौर। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। साइबर ठगी और मानसिक ब्लैकमेलिंग से परेशान एक विवाहित महिला ने फंदे से लटककर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। महिला की डायरी से मिले सुसाइड नोट ने न सिर्फ उसकी पीड़ा को उजागर किया, बल्कि साइबर अपराध के उस खतरनाक चेहरे को भी सामने ला दिया, जो लोगों को अंदर तक तोड़ देता है।

सुसाइड नोट में छलका दर्द, आखिरी शब्दों ने रुलाया

मृतका मोनिका द्वारा लिखे गए करीब डेढ़ पन्ने के सुसाइड नोट ने हर किसी को भावुक कर दिया। उसने अपने पति के नाम लिखते हुए कहा— “सॉरी, माई डियर हसबैंड… आई लव यू पतिदेव जी… प्लीज मेरे बच्चों का ध्यान रखना…” इन शब्दों में उसका दर्द, डर और बेबसी साफ झलक रही है। उसने यह भी लिखा कि एक युवक लंबे समय से उसे परेशान कर रहा था और अब उसे ब्लैकमेल कर रहा था। मोनिका ने अपने पति से माफी मांगते हुए कहा कि वह उनसे झूठ नहीं बोल सकती और बहुत कुछ बताना चाहती थी, लेकिन हालात ने उसे ऐसा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।

बिना पुलिस सूचना के कर दिया अंतिम संस्कार

घटना 28 अप्रैल की सुबह की बताई जा रही है। हैरानी की बात यह रही कि शुरुआत में पुलिस को सूचना नहीं दी गई और परिजनों ने जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया। हालांकि बाद में जब सुसाइड नोट सामने आया, तो पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया। परिवार ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया और ब्लैकमेलिंग की आशंका जताई।

‘डिजिटल अरेस्ट’ के जाल में फंसी थी मोनिका

जांच में सामने आया है कि मोनिका कथित रूप से साइबर अपराधियों के जाल में फंसी हुई थी। आरोपी खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर उसे लगातार डराते और धमकाते थे।

  • अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल
  • विदेशी सीरीज के नंबरों का इस्तेमाल
  • कार्रवाई और गिरफ्तारी की धमकी
  • परिवार को नुकसान पहुंचाने की चेतावनी

इन सबने मिलकर मोनिका को मानसिक रूप से तोड़ दिया। ऑडियो रिकॉर्डिंग में भी उसे धमकाने की बातें सामने आई हैं।

परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी से टूटी हिम्मत

मोनिका के करीबियों के अनुसार, वह पिछले कई दिनों से तनाव में थी। हालांकि उसने खुलकर किसी से अपनी परेशानी साझा नहीं की। सुसाइड नोट में उसने अपने माता-पिता और भाइयों से भी माफी मांगी है। अपनी बेटी के लिए लिखे भावुक शब्द पढ़कर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार का कहना है कि लगातार मिल रही धमकियों ने उसे इतना डरा दिया था कि वह अंदर ही अंदर टूटती चली गई।

5 हजार रुपये ट्रांसफर करने का भी शक

मोनिका के पति रणवीर (कुछ जगह रणधीर नाम भी सामने आया) ने पुलिस को बताया कि घटना से एक दिन पहले वह घर से 5 हजार रुपये लेकर गई थी। बाद में पता चला कि उसने साइबर कैफे के माध्यम से यह रकम ट्रांसफर करवाई। चौंकाने वाली बात यह है कि उसके मोबाइल में न तो यूपीआई ऐप था और न ही कोई बैंकिंग एप्लिकेशन इस्तेमाल किया गया था। इससे यह शक और गहरा गया है कि वह रकम साइबर ठगों को ही भेजी गई थी।

तीन मोबाइल नंबर पुलिस को सौंपे

मामले में पति ने पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही तीन मोबाइल नंबर भी दिए हैं, जिनसे लगातार कॉल आने का दावा किया गया है। परिवार का कहना है कि अंतिम संस्कार के दौरान भी एक युवक ने वीडियो कॉल कर संपर्क करने की कोशिश की, जिससे शक और गहरा गया है कि यह पूरा मामला सुनियोजित साइबर ब्लैकमेलिंग का है।

पुलिस ने शुरू की जांच, साइबर एंगल पर फोकस

पुलिस अधीक्षक अभिषेक झा ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की गहन जांच की जा रही है। पुलिस अब—

  • कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाल रही है
  • संदिग्ध नंबरों की लोकेशन ट्रेस कर रही है
  • साइबर सेल को भी जांच में लगाया गया है

अधिकारियों का कहना है कि दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

समाज के लिए बड़ा सबक: चुप्पी बनी जानलेवा

यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के लिए बड़ा सबक है। साइबर अपराध आज सिर्फ आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह लोगों की मानसिक स्थिति पर भी गहरा असर डाल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि—

  • ऐसे मामलों में तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए
  • परिवार और करीबी लोगों से बात साझा करनी चाहिए

डरकर चुप रहने से अपराधियों का हौसला बढ़ता है

‘इंसाफ’ का इंतजार, सवालों के बीच एक अधूरी कहानी

मोनिका की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—

  • क्या समय रहते मदद मिलती तो उसकी जान बच सकती थी?
  • क्या साइबर अपराधियों का नेटवर्क और बड़ा है?

फिलहाल, परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है और पुलिस जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं। मोनिका के आखिरी शब्द “बच्चों का ध्यान रखना…”आज भी हर किसी के दिल को चीर रहे हैं।

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