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भोपाल। राजधानी भोपाल के AIIMS Bhopal से शुक्रवार सुबह एक ऐसी घटना सामने आई जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। रेबीज के एडवांस स्टेज से जूझ रहा 24 वर्षीय युवक अचानक बेकाबू हुआ और अस्पताल की पहली मंजिल की खिड़की तोड़कर नीचे कूद गया। सिर में गंभीर चोट लगने से मौके पर ही उसकी मौत हो गई। इस घटना ने न सिर्फ अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था, बल्कि कुत्ते के काटने के बाद इलाज में बरती जाने वाली लापरवाही पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

होली पर हुआ मामूली जख्म, बना मौत की वजह

मृतक युवक मध्य प्रदेश के Vidisha जिले का रहने वाला था और दिहाड़ी मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। जांच अधिकारी Hemraj Kumre के मुताबिक, करीब दो महीने पहले होली के दौरान गांव में एक पालतू कुत्ते ने उसे काट लिया था। उस समय इसे मामूली घटना मानकर नजरअंदाज कर दिया गया। यहीं से लापरवाही की शुरुआत हुई—न तो समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाई गई और न ही डॉक्टर से परामर्श लिया गया। धीरे-धीरे शरीर में संक्रमण फैलता गया और स्थिति गंभीर होती चली गई।

तबीयत बिगड़ी तो अस्पतालों के चक्कर

करीब एक सप्ताह पहले युवक की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उसे तेज बुखार, बेचैनी और घबराहट होने लगी। 27 अप्रैल को हालत ज्यादा खराब होने पर परिजनों ने पहले एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां से हालत गंभीर बताकर उसे भोपाल रेफर कर दिया गया। गुरुवार को उसे AIIMS Bhopal में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसमें Rabies के एडवांस लक्षण पाए।

रात भर अजीब हरकतें, सुबह मच गया हड़कंप

परिजनों के अनुसार, गुरुवार रात से ही युवक का व्यवहार पूरी तरह बदल गया था। वह कभी चिल्लाता, कभी भागने की कोशिश करता और बीच-बीच में कुत्तों की तरह भौंकने लगता। डॉक्टरों और स्टाफ ने उसे संभालने की कोशिश की, लेकिन हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे अचानक उसने बेकाबू होकर वार्ड की खिड़की का कांच तोड़ दिया और पहली मंजिल से नीचे छलांग लगा दी। नीचे गिरते ही उसका सिर बुरी तरह टकराया और कुछ ही पलों में उसकी मौत हो गई। अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई।

हादसा नहीं, बीमारी का खौफनाक असर

डॉक्टरों का कहना है कि Rabies के एडवांस स्टेज में मरीज का व्यवहार पूरी तरह बदल जाता है।

उसे पानी से डर लगने लगता है (हाइड्रोफोबिया), मानसिक असंतुलन हो जाता है और कई बार मरीज आक्रामक या असामान्य हरकतें करने लगता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस स्टेज में पहुंचने के बाद बीमारी लगभग लाइलाज हो जाती है और मौत तय मानी जाती है।

पुलिस जांच में जुटी, सुरक्षा पर सवाल

घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच अधिकारी Hemraj Kumre ने बताया कि अस्पताल स्टाफ और परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि मरीज पर पर्याप्त निगरानी थी या नहीं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि गंभीर मरीज वार्ड से खिड़की तक कैसे पहुंचा? क्या सुरक्षा में चूक हुई? अस्पताल प्रशासन भी अंदरूनी जांच में जुट गया है।

छिंदवाड़ा में भी सामने आया था ऐसा मामला

कुछ ही हफ्ते पहले मध्य प्रदेश के Chhindwara में भी इसी तरह का मामला सामने आया था, जहां एक महिला में Rabies के लक्षण दिखे थे और वह लोगों पर हमला करने लगी थी। इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि यह बीमारी कितनी खतरनाक और भयावह हो सकती है।

एक इंजेक्शन बचा सकता था जिंदगी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कुत्ते के काटने के बाद अगर तुरंत एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवा ली जाए, तो इस बीमारी से पूरी तरह बचाव संभव है। लेकिन ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी और लापरवाही के कारण लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका खामियाजा जान देकर चुकाना पड़ता है। डॉक्टरों के अनुसार:

  • कुत्ते के काटने के तुरंत बाद घाव को साबुन-पानी से धोना चाहिए
  • 24 घंटे के भीतर वैक्सीन लगवाना जरूरी है
  • डॉक्टर की सलाह के बिना इलाज अधूरा न छोड़ें

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

युवक की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। जो मामूली जख्म समझा गया था, वही कुछ हफ्तों में जानलेवा बन गया। परिजन अब यही कहते नजर आ रहे हैं—काश उस दिन टीका लगवा दिया होता। यह घटना एक चेतावनी भी है कि छोटी सी लापरवाही कितनी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।

समाज के लिए सबक

भोपाल की यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक बड़ा सबक है। रेबीज जैसी बीमारी आज भी लोगों की जान ले रही है, जबकि इसका इलाज शुरुआती स्टेज में बेहद आसान और सस्ता है। जरूरत है जागरूकता, समय पर इलाज और अस्पतालों में बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की—ताकि ऐसी दर्दनाक घटनाएं दोबारा न हों।

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