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कोटा। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG से ठीक 24 घंटे पहले कोचिंग हब Kota से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र में शनिवार सुबह एक 20 वर्षीय छात्र दीक्षित प्रसाद की हॉस्टल की तीसरी मंजिल से गिरकर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि उस दबाव की भी कहानी कहती है जो हर साल हजारों छात्रों को इस शहर में झेलना पड़ता है।

सुबह 6:30 बजे चीखों से टूटी खामोशी

शनिवार की सुबह करीब 6:30 बजे कुन्हाड़ी इलाके में अचानक अफरा-तफरी मच गई। हॉस्टल के बाहर एक युवक लहूलुहान हालत में पड़ा मिला। आसपास के छात्रों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। कुन्हाड़ी थाना प्रभारी Devesh Bhardwaj के अनुसार, सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और छात्र को तत्काल अस्पताल ले जाया गया। लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि कई कमरे खुल गए और छात्र बाहर निकल आए। कुछ ही मिनटों में हॉस्टल के बाहर भीड़ जमा हो गई।

दो साल की मेहनत, एक पल में खत्म

मृतक दीक्षित प्रसाद उत्तराखंड का रहने वाला था और पिछले दो वर्षों से कोटा में रहकर NEET-UG की तैयारी कर रहा था। रविवार को उसकी परीक्षा थी—वह परीक्षा जिसके लिए उसने दिन-रात एक कर दिया था। परिवार और दोस्तों के अनुसार, दीक्षित पढ़ाई में अच्छा था और हाल के दिनों में वह अपने टेस्ट स्कोर को लेकर थोड़ा चिंतित जरूर था, लेकिन उसने कभी किसी बड़े तनाव का खुलकर जिक्र नहीं किया। उसके साथ रहने वाले छात्रों का कहना है कि शुक्रवार रात तक सब कुछ सामान्य था। उसने खाना खाया, कुछ देर पढ़ाई की और अपने कमरे में सोने चला गया।

हादसा या आत्महत्या? उलझी जांच

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह हादसा था या आत्महत्या? पुलिस ने दोनों एंगल से जांच शुरू कर दी है। कमरे की तलाशी में कोई सुसाइड नोट या संदिग्ध सामग्री नहीं मिली है। पुलिस ने कमरे को सील कर दिया है और मोबाइल, नोट्स और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल्स और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कहीं छात्र का संतुलन बिगड़ने से वह बालकनी से गिरा तो नहीं।

कोटा का दबाव: एक खामोश संकट

Kota देशभर में मेडिकल और इंजीनियरिंग परीक्षाओं की तैयारी का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। हर साल लाखों छात्र यहां आते हैं, लेकिन इसी के साथ मानसिक दबाव, अकेलापन और प्रतिस्पर्धा का बोझ भी बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा के ठीक पहले का समय छात्रों के लिए सबसे ज्यादा तनावपूर्ण होता है। नींद की कमी, रिजल्ट का डर और परिवार की उम्मीदें कई बार मानसिक संतुलन को प्रभावित करती हैं। पिछले कुछ वर्षों में कोटा में छात्रों की आत्महत्या और संदिग्ध मौतों के मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। सरकार और प्रशासन समय-समय पर गाइडलाइंस जारी करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर असर अभी भी सीमित नजर आता है।

हॉस्टल सुरक्षा पर उठे सवाल

इस घटना के बाद हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। क्या तीसरी मंजिल की बालकनी पर्याप्त सुरक्षित थी? क्या रेलिंग की ऊंचाई मानकों के अनुरूप थी? स्थानीय लोगों का कहना है कि कई हॉस्टल में सुरक्षा मानकों का पालन ठीक से नहीं किया जाता। अगर बालकनी सुरक्षित होती, तो शायद यह हादसा टल सकता था। प्रशासन अब हॉस्टल मालिकों से सुरक्षा मानकों की रिपोर्ट मांग सकता है। वहीं पुलिस अन्य छात्रों से पूछताछ कर रही है ताकि घटना के हर पहलू को समझा जा सके।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

घटना की सूचना मिलते ही दीक्षित के परिवार में कोहराम मच गया। उत्तराखंड से परिजन कोटा के लिए रवाना हो चुके हैं। परिवार के आने के बाद ही पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पुलिस का कहना है कि परिजनों के बयान भी जांच में अहम भूमिका निभाएंगे। पड़ोसियों और दोस्तों के मुताबिक, दीक्षित अपने परिवार का होनहार बेटा था और डॉक्टर बनने का सपना देख रहा था।

परीक्षा से पहले दहशत का माहौल

रविवार को होने वाली NEET-UG परीक्षा से ठीक पहले इस घटना ने छात्रों में डर और बेचैनी बढ़ा दी है। कई छात्र अब मानसिक रूप से असहज महसूस कर रहे हैं। कुछ ने बताया कि ऐसी घटनाएं परीक्षा से पहले आत्मविश्वास को प्रभावित करती हैं। कोचिंग संस्थानों ने छात्रों को काउंसलिंग देने और उन्हें शांत रहने की सलाह दी है।

प्रशासन की नजर, लेकिन समाधान कब?

पुलिस और प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। जांच जारी है और जल्द ही सच्चाई सामने आने की उम्मीद है। लेकिन सवाल वही है—क्या हर बार ऐसी घटना के बाद सिर्फ जांच ही होगी या सिस्टम में कोई बड़ा बदलाव भी आएगा? कोटा में पढ़ने वाले लाखों छात्रों के लिए यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि पढ़ाई के साथ मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को भी उतनी ही प्राथमिकता देनी होगी।

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