नई दिल्ली। राजधानी एक बार फिर खून से लाल हो गई। भीड़भाड़ वाले पेट्रोल पंप पर जो हुआ, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। Lado Sarai इलाके में शनिवार रात चार हमलावरों ने तीन दोस्तों को दौड़ा-दौड़ाकर चाकुओं से गोद दिया। चीखें गूंजती रहीं, लेकिन मौजूद लोग तमाशबीन बने रहे। इस हमले में 24 वर्षीय अली अमन की मौत हो गई, जबकि उसके दो दोस्त गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं।
पेट्रोल पंप पर खौफ का मंजर, CCTV में कैद हुई दरिंदगी
घटना रात करीब 11 बजे की है। Saket थाना क्षेत्र के लाडो सराय स्थित पेट्रोल पंप पर अली अमन अपने दोस्तों सुफियान और ऋतिक के साथ बाइक में पेट्रोल भरवाने पहुंचे थे। तभी अचानक 4-5 हमलावर वहां पहुंचे और बिना किसी चेतावनी के तीनों पर हमला बोल दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमले के बाद तीनों युवक जान बचाने के लिए इधर-उधर भागे, लेकिन हमलावरों ने उनका पीछा किया और एक-एक कर पकड़कर चाकुओं से ताबड़तोड़ वार किए। पूरा घटनाक्रम पेट्रोल पंप पर लगे CCTV कैमरों में कैद हो गया है, जिसे पुलिस खंगाल रही है।
20 से ज्यादा वार… अली अमन की मौके पर ही मौत
हमले की बर्बरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अली अमन पर 20 से ज्यादा वार किए गए। ऋतिक पर 15 से 20 और सुफियान पर करीब 8 बार चाकू से हमला हुआ। घटना के बाद तीनों को तुरंत Safdarjung Hospital ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने अली अमन को मृत घोषित कर दिया। ऋतिक की हालत नाजुक बनी हुई है, जबकि सुफियान का इलाज जारी है। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि जिस वक्त यह हमला हो रहा था, पेट्रोल पंप पर काफी लोग मौजूद थे। स्टाफ और ग्राहक सब कुछ देखते रहे, लेकिन किसी ने भी बीच-बचाव करने की हिम्मत नहीं दिखाई। पीड़ित मदद के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन हमलावर बेखौफ होकर वार करते रहे और फिर मौके से फरार हो गए। इस घटना ने समाज में बढ़ती संवेदनहीनता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
ऑटो चलाकर पाल रहा था परिवार, इकलौते बेटे की मौत से टूटा घर
मृतक अली अमन एक साधारण परिवार से था और ऑटो चलाकर अपने परिवार का गुजारा करता था। उसके परिवार में मां और दो बहनें हैं। रिश्तेदार यूसुफ अली खान के मुताबिक, अली ही घर का सहारा था। एक बहन की शादी तय थी और घर की सारी जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी। मौसी बीनू का कहना है— “अगर वहां मौजूद लोग थोड़ी हिम्मत दिखाते, तो शायद मेरा लाल आज जिंदा होता।” यह बयान उस दर्द को बयां करता है, जिसने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है। पुलिस के मुताबिक, तीनों युवक Mehrauli की इस्लाम कॉलोनी के रहने वाले हैं। घायलों ने चार हमलावरों के नाम बताए हैं, जिनकी तलाश में पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। सूत्रों के अनुसार, आरोपी और पीड़ित एक-दूसरे को पहले से जानते थे और घटना से पहले उनकी मुलाकात भी हुई थी। इससे पुरानी रंजिश या विवाद की आशंका जताई जा रही है।
ओखला में भी चाकूबाजी, मामूली कहासुनी बनी खूनी झगड़ा
राजधानी में चाकूबाजी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। Okhla Phase 2 में एक पार्क में मामूली कहासुनी के बाद तीन युवकों ने एक युवक पर चाकू से हमला कर दिया। बीच-बचाव करने आए उसके दोस्त को भी घायल कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक, 17 वर्षीय अनमोल कुमार ने बताया कि उसका दोस्त समीर पार्क में खेल रहा था, तभी अरमान से विवाद हो गया। बाद में अरमान अपने साथियों के साथ लौटा और हमला कर दिया।
मैदानगढ़ी में सौतेले पिता पर जानलेवा हमला
Maidangarhi इलाके में भी एक सनसनीखेज मामला सामने आया, जहां मां की दूसरी शादी से नाराज बेटे ने अपने सौतेले पिता पर चाकू से हमला कर दिया। आरोपी युवक ने पेट में चाकू घोंप दिया और उसे वहीं फंसा छोड़ फरार हो गया। घायल को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां ऑपरेशन कर चाकू निकाला गया। दिल्ली पुलिस ने लाडो सराय मामले में हत्या और हत्या के प्रयास का केस दर्ज कर लिया है। CCTV फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की तलाश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इलाके में पुलिस की गश्त भी बढ़ा दी गई है ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
राजधानी में बढ़ती वारदातें, कानून-व्यवस्था पर सवाल
लगातार सामने आ रही चाकूबाजी और हमले की घटनाओं ने दिल्ली की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरेआम भीड़ के बीच इस तरह की वारदात होना यह दिखाता है कि अपराधियों के मन में कानून का डर कम होता जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे मामलों में सिर्फ पुलिस कार्रवाई ही नहीं, बल्कि समाज को भी जिम्मेदारी निभानी होगी। अगर लोग समय पर हस्तक्षेप करें, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। लाडो सराय की यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि एक चेतावनी है—कि राजधानी की सड़कों पर खौफ का साया गहराता जा रहा है। जब भीड़ के बीच कोई सुरक्षित नहीं, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर आम आदमी कब तक डर के साये में जिएगा? अब नजरें पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या आरोपी जल्द पकड़े जाएंगे और पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा?