उमरिया। मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के ग्राम मरदर से सामने आई यह घटना इंसानियत को झकझोर देने वाली है। करीब डेढ़ महीने पहले खेत के पास कंबल में लिपटा मिला 60 वर्षीय मन्नू सिंह का शव अब एक ऐसे खौफनाक सच के साथ सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि यह कोई सामान्य मौत नहीं, बल्कि अंधविश्वास के नाम पर रची गई एक सोची-समझी साजिश थी।
कंबल में लिपटा शव, पहली नजर में लगा सामान्य मामला
20 मार्च की सुबह गांव के लोगों ने साजा के पेड़ के नीचे एक कंबल में लिपटा शव देखा। पहचान होने पर पता चला कि वह गांव के ही बुजुर्ग मन्नू सिंह हैं। शुरुआत में मामला सामान्य मौत का लग रहा था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने कहानी बदल दी। रिपोर्ट में साफ हुआ कि बुजुर्ग का गला घोंटा गया था और शरीर पर कई चोटों के निशान थे। इसके बाद पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच तेज कर दी।
झूठी लोकेशन, मोबाइल ने खोला राज
जांच के दौरान पुलिस को गांव के ही विनोद सिंह और दीनदयाल सिंह पर शक हुआ। पूछताछ में दोनों ने खुद को बेंगलुरु और जयपुर में होने की बात कही। लेकिन जब पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य—मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल—खंगाली, तो दोनों की कहानी झूठी साबित हुई। कड़ाई से पूछताछ के बाद दोनों ने अपना गुनाह कबूल लिया और बताया कि इस वारदात में उनका तीसरा साथी मनोज सिंह भी शामिल था। तीनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
‘जादू-टोने’ के शक ने छीनी जान
पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों को शक था कि मन्नू सिंह उन पर जादू-टोना कर रहे हैं। इसी अंधविश्वास के चलते उन्होंने हत्या की साजिश रची। एडिशनल एसपी सीताराम सत्या के मुताबिक, “यह घटना समाज में फैले अंधविश्वास की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका उदाहरण है। महज शक के आधार पर एक बुजुर्ग की हत्या कर दी गई।”
ऐसे रची गई साजिश, खेत में बुलाकर किया हमला
आरोपियों ने पहले मन्नू सिंह को झाड़-फूंक कराने के बहाने खेत की ओर बुलाया। वहां पहले से घात लगाकर बैठे तीनों ने डंडों से हमला किया और फिर गला घोंटकर उनकी हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद पहचान छुपाने के लिए शव को कंबल में लपेटकर नाले के पास फेंक दिया।
डेढ़ महीने तक उलझी रही गुत्थी, अब तीनों आरोपी सलाखों के पीछे
करीब 45 दिन तक यह मामला रहस्य बना रहा। गांव में तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं, लेकिन पुलिस ने तकनीकी और स्थानीय साक्ष्यों के आधार पर आखिरकार केस सुलझा लिया। तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
समाज के लिए बड़ा सवाल: क्या अब भी जिंदा है अंधविश्वास?
यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि समाज के उस काले पहलू को उजागर करती है जहां आज भी अंधविश्वास के नाम पर लोगों की जान ली जा रही है। शिक्षा और आधुनिकता के बावजूद ऐसे मामले यह सवाल खड़ा करते हैं कि क्या हम सच में 21वीं सदी में जी रहे हैं?
पुलिस की अपील
पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह के अंधविश्वास या अफवाहों पर विश्वास न करें। किसी भी संदेह की स्थिति में कानून का सहारा लें, न कि खुद न्याय करने की कोशिश करें।