नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले घुसपैठ का मुद्दा एक बार फिर सियासत के केंद्र में आ गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर गंभीर आरोप लगाते हुए सीमा सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा किया है। इसी बीच बीजेपी सांसद Nishikant Dubey द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किया गया एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर बांग्लादेश से भारत में घुसपैठ का रास्ता दिखाया गया है।
इच्छामति नदी बना ‘रास्ता’, वीडियो में दिखा खुला बॉर्डर
बीजेपी सांसद द्वारा शेयर किए गए वीडियो में पश्चिम बंगाल के बशीरहाट क्षेत्र के टाकी इलाके का जिक्र किया गया है। यह इलाका Ichamati River के किनारे स्थित है, जिसके उस पार बांग्लादेश की सीमा लगती है। वीडियो में दावा किया गया है कि नदी के जरिए बिना किसी सख्त रोक-टोक के लोग सीमा पार कर सकते हैं। छोटे नावों और उथले पानी वाले हिस्सों का इस्तेमाल कर घुसपैठिए आसानी से भारतीय सीमा में प्रवेश कर जाते हैं। बीजेपी सांसद ने वीडियो के साथ लिखा कि “देखिए कैसे बांग्लादेश से लोग भारत में घुस सकते हैं।” इस वीडियो के सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
घुसपैठ बना चुनावी ‘हॉट टॉपिक’
पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में घुसपैठ का मुद्दा बीजेपी के लिए बड़ा राजनीतिक हथियार बन गया है। पार्टी लगातार टीएमसी सरकार पर आरोप लगा रही है कि वह वोटबैंक की राजनीति के चलते सीमा सुरक्षा को नजरअंदाज कर रही है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में एक जनसभा में कहा कि “घुसपैठ के कारण बंगाल की भाषा, संस्कृति और सामाजिक संतुलन पर असर पड़ रहा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की नीतियों के कारण अवैध घुसपैठ को बढ़ावा मिला है, जिससे स्थानीय लोगों की पहचान और संसाधनों पर दबाव बढ़ा है।
तुष्टीकरण बनाम सुरक्षा: पीएम मोदी का सीधा हमला
प्रधानमंत्री मोदी ने टीएमसी सरकार पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य में आदिवासी समुदाय और उनकी भाषा की अनदेखी की जा रही है, जबकि मदरसा शिक्षा पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। पीएम ने कहा कि “संथाली भाषा और संस्कृति को सम्मान नहीं मिल रहा, लेकिन तुष्टीकरण की राजनीति चरम पर है।” यह बयान चुनावी माहौल को और ज्यादा गरमा गया है।
सीमा की हकीकत: 4000 किमी बॉर्डर, 500 किमी अब भी खुला
भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा पश्चिम बंगाल से गुजरता है। राज्य में करीब 2,216 किलोमीटर सीमा पड़ती है। जानकारों के मुताबिक, इस लंबी सीमा का लगभग 500 किलोमीटर हिस्सा अभी भी पूरी तरह से बाड़बंदी से कवर नहीं हो पाया है। यही वजह है कि इन इलाकों को घुसपैठ के लिहाज से सबसे संवेदनशील माना जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि नदी, दलदली जमीन और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में फेंसिंग करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होता है, जिसका फायदा घुसपैठिए उठाते हैं।
बीएसएफ और राज्य सरकार में खींचतान
केंद्र सरकार और सीमा सुरक्षा बल (BSF) लंबे समय से सीमा पर बाड़बंदी को मजबूत करने की बात कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कई बार पश्चिम बंगाल सरकार को जमीन उपलब्ध कराने के लिए पत्र भी भेजे गए हैं। बीजेपी का आरोप है कि राज्य सरकार जमीन देने में देरी कर रही है, जिससे सीमा सुरक्षा परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं। वहीं टीएमसी इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज करती रही है।
नदी, जंगल और गांव: घुसपैठ के ‘तीन रास्ते’
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ के तीन प्रमुख रास्ते सामने आते हैं— नदी मार्ग: इच्छामति और अन्य नदियों के जरिए नावों से पार बिना फेंसिंग वाले इलाके: जहां बाड़बंदी अधूरी है घनी आबादी वाले गांव: जहां सीमा के दोनों तरफ रिश्तेदारी और आवाजाही बनी रहती है इन्हीं कारणों से यह सीमा देश की सबसे संवेदनशील सीमाओं में गिनी जाती है।
चुनाव से पहले बढ़ा सियासी तापमान
जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे घुसपैठ का मुद्दा और ज्यादा गर्माता जा रहा है। बीजेपी इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और पहचान से जोड़कर पेश कर रही है, जबकि टीएमसी इसे राजनीतिक एजेंडा करार दे रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस मुद्दे का सीधा असर सीमावर्ती जिलों की राजनीति और वोटिंग पैटर्न पर पड़ सकता है।