तेहरान/नई दिल्ली। दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्ग Strait of Hormuz पर मचे बवाल ने अब ईरान के अंदरूनी सत्ता संघर्ष को भी उजागर कर दिया है। एक तरफ ईरान अमेरिका और इजरायल से टकराव में उलझा है, तो दूसरी तरफ उसके भीतर ही इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और विदेश मंत्रालय के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। हाल ही में जहाजों पर हुई फायरिंग ने इस विवाद को और गहरा कर दिया है।
विदेश मंत्री की घोषणा और IRGC की कार्रवाई में टकराव
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने हाल ही में घोषणा की थी कि लेबनान में संघर्ष विराम के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापारिक जहाजों के लिए खोल दिया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बयान जारी करते हुए कहा था कि सभी जहाज तय मार्ग से सुरक्षित रूप से गुजर सकते हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि इसी घोषणा के कुछ ही समय बाद IRGC ने जलडमरूमध्य से गुजर रहे जहाजों पर गोलीबारी शुरू कर दी। इस विरोधाभासी कार्रवाई ने सवाल खड़े कर दिए कि क्या ईरान के भीतर ही अलग-अलग शक्ति केंद्र अलग-अलग फैसले ले रहे हैं?
भारतीय जहाजों पर फायरिंग से बढ़ी चिंता
घटना के दौरान दो भारतीय जहाजों को भी निशाना बनाया गया, जिनमें से एक में कच्चा तेल लदा हुआ था। फायरिंग के बाद जहाजों को बीच रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा। यह घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि ईरान पहले ही इन जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने की अनुमति दे चुका था। ऐसे में IRGC की कार्रवाई को ईरान के भीतर मतभेदों का सीधा संकेत माना जा रहा है।
IRGC की नाराजगी के संकेत
विश्लेषकों का मानना है कि IRGC, विदेश मंत्री के उस फैसले से नाराज है जिसमें उन्होंने जलडमरूमध्य को खुला घोषित किया था। ईरान के सैन्य और राजनीतिक ढांचे में IRGC की भूमिका बेहद मजबूत मानी जाती है, और कई बार वह विदेश नीति के फैसलों को भी प्रभावित करता है। ईरान के संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने भी सख्त बयान देते हुए कहा कि अगर अमेरिका की नाकेबंदी जारी रही तो होर्मुज खुला नहीं रहेगा। उन्होंने साफ कहा कि इस तरह के फैसले सोशल मीडिया पर नहीं लिए जाते।
तस्नीम न्यूज ने विदेश मंत्री को घेरा
IRGC के करीबी माने जाने वाले मीडिया प्लेटफॉर्म Tasnim News Agency ने भी विदेश मंत्री की आलोचना करते हुए विवाद को और हवा दे दी। तस्नीम ने अपने बयान में कहा— विदेश मंत्री का ट्वीट अधूरी जानकारी पर आधारित था इससे जहाजों के गुजरने को लेकर भ्रम पैदा हुआ संचार में गंभीर कमी दिखाई दी इस बयान के बाद यह साफ हो गया कि ईरान के भीतर सत्ता के अलग-अलग धड़े खुलकर आमने-सामने आ गए हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव बना बड़ी वजह
इस पूरे विवाद के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को माना जा रहा है। ईरान लगातार आरोप लगा रहा है कि अमेरिका उसकी समुद्री गतिविधियों को रोकने की कोशिश कर रहा है। अगर अमेरिका की ओर से दबाव बढ़ता है, तो IRGC जैसे ताकतवर सैन्य संगठन ज्यादा आक्रामक रुख अपनाते हैं, जिससे विदेश मंत्रालय के कूटनीतिक प्रयास कमजोर पड़ जाते हैं।
‘कौन चला रहा है ईरान?’ उठे बड़े सवाल
इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सवाल उठने लगा है कि आखिर ईरान में असली नियंत्रण किसके हाथ में है—
- चुनी हुई सरकार
- विदेश मंत्रालय
- या फिर IRGC जैसी शक्तिशाली सैन्य इकाई
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विरोधाभासी फैसले वैश्विक कूटनीति के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।
वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल व्यापार का सबसे अहम मार्ग है, जहां से रोजाना लाखों बैरल कच्चा तेल गुजरता है। यहां किसी भी तरह का तनाव सीधे तौर पर वैश्विक बाजार को प्रभावित करता है। अगर यह संकट लंबा खिंचता है, तो
- तेल की कीमतों में उछाल
- सप्लाई चेन में बाधा
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अस्थिरता
जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।
भारत समेत दुनिया की बढ़ी चिंता
भारतीय जहाजों पर हुई फायरिंग के बाद भारत ने भी इस पूरे मामले पर कड़ी नजर रखी है। भारत के लिए होर्मुज बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश का बड़ा हिस्सा तेल आयात इसी मार्ग से होता है। ऐसे में किसी भी तरह की अस्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है।