नई दिल्ली। गिरते बाजार में अडानी को मिला विदेशी सहारा, भारतीय शेयर बाजार में इस समय भारी उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच अडानी ग्रुप को एक बार फिर बड़ा सहारा मिला है। अमेरिकी एसेट मैनेजमेंट कंपनी GQG Partners ने जनवरी से मार्च तिमाही के दौरान अडानी ग्रुप की कई प्रमुख कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर बाजार को चौंका दिया है।
संकट में साथ, अब फिर जताया भरोसा
GQG पार्टनर्स के प्रमुख Rajiv Jain का यह कदम एक बार फिर यह दर्शाता है कि वे अडानी ग्रुप के दीर्घकालिक भविष्य को लेकर आश्वस्त हैं। जब बाजार में डर और अनिश्चितता का माहौल है और अधिकांश विदेशी निवेशक दूरी बना रहे हैं, ऐसे समय में GQG का निवेश अडानी ग्रुप के लिए मनोबल बढ़ाने वाला माना जा रहा है। इससे पहले भी हिंडनबर्ग संकट के समय GQG ने भारी निवेश कर बाजार में स्थिरता लाने में अहम भूमिका निभाई थी।
इन कंपनियों में बढ़ाया दांव
मार्च तिमाही के आंकड़ों के अनुसार GQG ने Adani Energy Solutions में अपनी हिस्सेदारी 4.79 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.88 प्रतिशत कर दी है। इसी तरह Adani Green Energy में उसका निवेश 4.31 प्रतिशत से बढ़कर 4.54 प्रतिशत हो गया है, जबकि ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी Adani Enterprises में हिस्सेदारी मामूली बढ़कर 3.90 प्रतिशत तक पहुंच गई है। हालांकि Adani Power में उसने हल्की मुनाफावसूली करते हुए हिस्सेदारी थोड़ी घटा दी है, जो अब 4.80 प्रतिशत रह गई है।
दूसरी तरफ विदेशी निवेशकों की सतर्कता
जहां GQG ने भरोसा दिखाया है, वहीं अन्य विदेशी संस्थागत निवेशकों ने काफी सतर्क रुख अपनाया है। अडानी ग्रुप की कई कंपनियों में उनकी हिस्सेदारी घटती नजर आई है। Adani Energy Solutions में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 13.47 प्रतिशत से घटकर 12.23 प्रतिशत रह गई है, जबकि Adani Enterprises में यह 11.64 प्रतिशत से घटकर 10.8 प्रतिशत पर आ गई है। Adani Green Energy में भी गिरावट दर्ज की गई है, जो 11.42 प्रतिशत से घटकर 11.1 प्रतिशत हो गई है। यह दर्शाता है कि बाजार में अभी भी जोखिम को लेकर सावधानी बनी हुई है।
LIC और म्यूचुअल फंड की रणनीति
सरकारी बीमा कंपनी Life Insurance Corporation of India ने अडानी ग्रुप में अपना भरोसा बरकरार रखा है। हालांकि Adani Ports and SEZ में उसकी हिस्सेदारी थोड़ी घटकर 6.63 प्रतिशत रह गई है, लेकिन अन्य कंपनियों में उसने अपनी स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। वहीं घरेलू म्यूचुअल फंड्स ने अलग रणनीति अपनाते हुए सीमेंट सेक्टर में अपना निवेश बढ़ाया है, जिससे ACC Limited और Ambuja Cements में उनकी हिस्सेदारी में इजाफा देखने को मिला है।
शेयरों का मिलाजुला प्रदर्शन
इस साल अडानी ग्रुप के शेयरों का प्रदर्शन पूरी तरह एक जैसा नहीं रहा है। कुछ कंपनियों ने शानदार तेजी दिखाई है, जबकि कुछ में गिरावट भी दर्ज की गई है। Adani Power में करीब 23 प्रतिशत की तेजी आई है, जबकि Adani Energy Solutions और Adani Green Energy ने भी सकारात्मक रिटर्न दिया है। दूसरी ओर ACC Limited और Ambuja Cements में गिरावट देखी गई है, जबकि NDTV और Adani Enterprises भी दबाव में रहे हैं। Adani Ports and SEZ में अपेक्षाकृत स्थिरता बनी रही है।
बाजार को मिला क्या संदेश
GQG पार्टनर्स का यह निवेश सिर्फ एक कारोबारी फैसला नहीं, बल्कि बाजार के लिए एक मजबूत संकेत भी है। जब वैश्विक स्तर का निवेशक गिरावट के दौर में भी हिस्सेदारी बढ़ाता है, तो यह बताता है कि वह कंपनी के बुनियादी ढांचे और भविष्य की संभावनाओं पर भरोसा रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अडानी ग्रुप का इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में मजबूत विस्तार उसे लंबे समय में फायदा पहुंचा सकता है।
निष्कर्ष: डर के बीच भरोसे की वापसी
एक तरफ विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार में दबाव बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर GQG जैसे निवेशकों का भरोसा अडानी ग्रुप के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। यह घटनाक्रम संकेत देता है कि आने वाले समय में यदि बाजार की परिस्थितियां सुधरती हैं, तो अडानी ग्रुप एक बार फिर निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है।