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नई दिल्ली/वॉशिंगटन: भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने अमेरिका दौरे के दौरान अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट से अहम मुलाकात की। इस बैठक में परमाणु ऊर्जा, कोयला गैसीकरण और एलपीजी निर्यात जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई। खास बात यह रही कि यह बैठक ऐसे समय में हुई जब पश्चिम एशिया में हालात संवेदनशील हैं और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा बड़ा मुद्दा बना हुआ है।

ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार पर फोकस

अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच बातचीत का मुख्य फोकस ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना, द्विपक्षीय ऊर्जा व्यापार को बढ़ाना और भारत-अमेरिका ऊर्जा साझेदारी को नई दिशा देना रहा। इस दौरान असैन्य परमाणु सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

अमेरिका ने जताई सहयोग की इच्छा

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिका, भारत के साथ असैन्य परमाणु ऊर्जा, कोयला गैसीकरण और एलपीजी निर्यात जैसे क्षेत्रों में सहयोग के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों का संकेत बताया।

‘शांति अधिनियम’ से खुले नए रास्ते

भारत सरकार द्वारा लागू ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी एक्ट’ (शांति अधिनियम) को असैन्य परमाणु क्षेत्र में बड़ा सुधार माना जा रहा है। इससे निजी भागीदारी को बढ़ावा मिला है और पुराने कानूनों को हटाकर नई संभावनाओं के रास्ते खोले गए हैं।

रक्षा और रणनीतिक सहयोग भी मजबूत

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से भी मुलाकात की। इसके अलावा रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। अमेरिकी उप रक्षा मंत्री स्टीव फाइनबर्ग और सेना सचिव डैन ड्रिस्कॉल के साथ बातचीत में आधुनिक रक्षा उपकरणों और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

आने वाले समय में और गहरे होंगे रिश्ते

मिस्री की इस यात्रा को भारत-अमेरिका संबंधों के लिए अहम माना जा रहा है। ऊर्जा, रक्षा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में बढ़ती साझेदारी से दोनों देशों के रिश्ते आने वाले समय में और मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं।

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