ईरान-इजराइल के बीच बिगड़ते हालात पर भारत ने संतुलित लेकिन सतर्क प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक रास्ता अपनाने की अपील की है। साथ ही क्षेत्र में रह रहे भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी कर अलर्ट रहने और मिशनों के संपर्क में रहने को कहा गया है।
नई दिल्ली की सधी रणनीति
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Ministry of External Affairs, India ने बयान जारी कर स्थिति पर गहरी चिंता जताई। मंत्रालय ने सभी देशों की संप्रभुता और अखंडता के सम्मान की बात दोहराई और सीधे तौर पर संयम बरतने की अपील की। भारत का रुख साफ है—न तो किसी पक्ष का खुला समर्थन, न तीखी आलोचना; बल्कि शांति, संवाद और कूटनीति का आग्रह।
एडवाइजरी जारी, मिशन अलर्ट मोड पर
सरकार ने ईरान, इजराइल समेत खाड़ी के कई देशों के लिए एडवाइजरी जारी की है। क्षेत्र में स्थित भारतीय मिशनों को नागरिकों के साथ लगातार संपर्क में रहने के निर्देश दिए गए हैं। इजराइल में करीब 10 हजार भारतीय रहते हैं, जिनमें लगभग 4 हजार छात्र हैं। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया जरूरी मानी जा रही है।
‘सतर्क रहें, स्थानीय गाइडलाइन मानें’
कतर, यूएई और फलस्तीन में स्थित भारतीय दूतावासों ने नागरिकों से सैन्य ठिकानों से दूर रहने, भीड़भाड़ से बचने और घरों के अंदर सुरक्षित रहने की सलाह दी है। ऐसी एडवाइजरी का उद्देश्य घबराहट फैलाना नहीं, बल्कि संभावित जोखिमों से पहले ही बचाव सुनिश्चित करना होता है।
क्या बन सकता है इवैक्युएशन प्लान?
सूत्रों के मुताबिक, अगर हालात और बिगड़ते हैं तो भारत सरकार अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए इवैक्युएशन ड्राइव शुरू कर सकती है। पिछले वर्षों में भारत ने यमन, यूक्रेन और सूडान जैसे संघर्ष क्षेत्रों से सफलतापूर्वक नागरिकों को निकाला है। वही अनुभव इस बार भी काम आ सकता है।
प्रधानमंत्री का शांति संदेश
दो दिन पहले इजराइल की यात्रा के दौरान Narendra Modi ने कहा था कि पश्चिम एशिया की स्थिरता भारत के हितों से जुड़ी है। उन्होंने सभी विवादों को संवाद और कूटनीति से सुलझाने की अपील की थी। यह बयान मौजूदा घटनाक्रम के संदर्भ में और भी अहम हो गया है।
भारत के लिए क्यों अहम है पश्चिम एशिया?
पश्चिम एशिया में करीब 9-10 मिलियन भारतीय काम करते हैं। यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा जरूरतों, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। इजराइल के साथ रक्षा और तकनीकी सहयोग मजबूत हुआ है, तो ईरान के साथ आर्थिक और परिवहन कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट जुड़े हैं। ऐसे में भारत को संतुलित नीति अपनानी ही होगी।
संतुलन ही असली ताकत
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की विदेश नीति की ताकत उसकी संतुलित कूटनीति में है। संकट के समय संयमित बयान और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संदेश देता है। हालांकि, अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो भारत के सामने कठिन फैसले हो सकते हैं।