अरावली पर्वतमाला में अवैध खनन को लेकर बढ़ती पर्यावरणीय तबाही पर अब सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपना लिया है। शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि अवैध माइनिंग को “हर कीमत पर” रोका जाना चाहिए। इस गंभीर मामले की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति (Expert Panel) गठित करने का फैसला लिया है, जो अरावली क्षेत्र की स्थिति, नुकसान और संरक्षण को लेकर विस्तृत रिपोर्ट देगी।
Supreme Court on Aravali Hills: अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा हस्तक्षेप
नई दिल्ली। देश की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक अरावली हिल्स को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। अरावली क्षेत्र में लगातार हो रहे अवैध खनन, पेड़ों की कटाई और पर्यावरणीय क्षति पर गहरी चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है, बल्कि एक विशेषज्ञ समिति (Expert Committee) के गठन का भी निर्देश दिया है यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अरावली क्षेत्र में खनन माफिया की गतिविधियों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं और राज्य सरकारों पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं।
CJI सूर्यकांत की पीठ ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अवैध खनन केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में कड़ी निगरानी (strict monitoring) पर विचार कर रहा है और एक ऐसी समिति बनाएगा जिसमें पर्यावरण, विज्ञान और खनन क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल होंगे।
बनेगा एक्सपर्ट पैनल, कोर्ट के निर्देश में करेगा काम
- सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की जाने वाली यह समिति:
- अरावली क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का आकलन करेगी
- अवैध खनन से हुए नुकसान की रिपोर्ट देगी
- संरक्षण और पुनर्स्थापन (restoration) के उपाय सुझाएगी
- कोर्ट के निर्देश और गाइडेंस में कार्य करेगी
कोर्ट ने सभी पक्षकारों से कहा है कि वे पर्यावरणविदों, वैज्ञानिकों और माइनिंग एक्सपर्ट्स के नाम सुझाएं।
अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी चेतावनी
राजस्थान के किसानों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने कोर्ट को बताया कि:
- 2024 में जस्टिस ओका बेंच के आदेशों के बावजूद
- नए खनन पट्टे दिए जा रहे हैं
- पेड़ों की अंधाधुंध कटाई जारी है
- इस पर CJI सूर्यकांत ने गहरी नाराजगी जताते हुए कहा:
अवैध खनन एक अपराध है और इसके विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। अधिकारियों को अपनी पूरी मशीनरी झोंकनी होगी।”
राज्य सरकारों को सुप्रीम निर्देश
- सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से राजस्थान सरकार को निर्देश देते हुए कहा कि:
- किसी भी हालत में गैरकानूनी खनन न होने दिया जाए
- मौजूदा आदेशों का सख्ती से पालन हो
- प्रशासनिक तंत्र जिम्मेदारी से काम करे
- कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि “जंगल” और “अरावली” की कानूनी परिभाषा को लेकर अलग से विचार किया जाएगा।
अरावली क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?
- अरावली पर्वतमाला:
- दिल्ली-NCR की ग्रीन शील्ड है
- भूजल स्तर बनाए रखने में अहम
- रेगिस्तान के फैलाव को रोकती है
- जैव विविधता (Biodiversity) का बड़ा केंद्र है
आगे क्या होगा?
- एमिकस क्यूरी के. परमेश्वर अरावली की परिभाषा पर विस्तृत नोट दाखिल करेंगे
- चार हफ्तों में रिपोर्ट सौंपी जाएगी
- उसके बाद सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई करेगा
- शीर्ष अदालत ने पहले ही अरावली की परिभाषा बदलने से जुड़े अपने पुराने निर्देशों पर रोक लगा रखी है।
पर्यावरण बनाम लालच की लड़ाई
अरावली पर सुप्रीम कोर्ट का यह कदम सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि पर्यावरणीय चेतावनी है। यह फैसला साफ संकेत देता है कि अब प्राकृतिक धरोहरों के साथ समझौता नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में यह मामला देश की पर्यावरण नीति की दिशा तय कर सकता है।