कुमाऊं के सीमावर्ती गांवों के 20 छात्र और दो शिक्षक 15 दिवसीय ‘राष्ट्रीय एकता दौरे’ पर निकले, दिल्ली से देहरादून, बरेली और लखनऊ तक हासिल किया नया अनुभव
बरेली। कुमाऊं के दुर्गम और सीमावर्ती गांवों में रहने वाले बच्चों के लिए भारतीय सेना की ‘सद्भावना’ पहल के तहत आयोजित पहला ‘राष्ट्रीय एकता दौरा’ (National Integration Tour) यादगार अनुभवों से भरा रहा। 15 से 28 अगस्त 2026 तक चले इस 15 दिवसीय दौरे में सीमांत क्षेत्रों के 20 छात्र और दो शिक्षक शामिल हुए। इस दौरान बच्चों को देश की सांस्कृतिक विरासत, लोकतांत्रिक संस्थाओं, सैन्य परंपराओं, शिक्षा, तकनीकी प्रगति और राष्ट्र निर्माण में सशस्त्र बलों की भूमिका को करीब से समझने का अवसर मिला।
पंचशूल ब्रिगेड के कमांडर ने दिखाई हरी झंडी
राष्ट्रीय एकता दौरे की शुरुआत पिथौरागढ़ से हुई। पंचशूल ब्रिगेड के कमांडर ब्रिगेडियर गौतम पठानिया ने छात्र दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि यह यात्रा उनके लिए देश को करीब से जानने और अपने भविष्य के लिए नई प्रेरणा हासिल करने का अनूठा अवसर है। उन्होंने छात्रों से यात्रा के दौरान अधिक से अधिक सीखने और अपने अनुभवों को अपने गांवों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति से मुलाकात बनी दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धि
दौरे का सबसे महत्वपूर्ण और यादगार पड़ाव 17 अगस्त 2026 को रहा, जब छात्रों को भारत के माननीय राष्ट्रपति से संवाद करने का अवसर मिला। सीमावर्ती गांवों के इन बच्चों के लिए यह अनुभव बेहद खास था। कई प्रतिभागियों के लिए यह अपने गांव से बाहर निकलकर देश की राजधानी तक पहुंचने का पहला अवसर था।
राष्ट्रपति से बातचीत ने बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाया
इसके बाद छात्रों ने राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट, कर्तव्य पथ और लाल किले सहित दिल्ली के अनेक ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण किया। उन्होंने संग्रहालयों और नेहरू तारामंडल का भी दौरा किया। नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचकर छात्रों ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इतिहास और शौर्य को करीब से जाना
दिल्ली यात्रा के दौरान छात्रों ने भारत के गौरवशाली इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता संघर्ष से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों को देखा। नेशनल वॉर मेमोरियल में शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के दौरान उन्हें भारतीय सशस्त्र बलों के त्याग, साहस और बलिदान की गहराई को समझने का अवसर मिला।
देहरादून में सैन्य संस्थानों से मिली नेतृत्व और अनुशासन की सीख
इसके बाद दल देहरादून पहुंचा। 24 अगस्त 2026 को छात्रों ने उत्तराखंड के माननीय राज्यपाल से मुलाकात की। इस दौरान उन्हें राष्ट्र सेवा, शिक्षा और युवाओं की भूमिका के संबंध में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन मिला।
छात्रों ने इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA), राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज (RIMC) और फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट का भी दौरा किया। सैन्य संस्थानों की कार्यप्रणाली, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और शिक्षा व्यवस्था को देखकर बच्चों में नई ऊर्जा और उत्साह दिखाई दिया।
बरेली में सेना के वरिष्ठ अधिकारी से साझा किए अनुभव
दौरे का अगला पड़ाव बरेली रहा। 25 अगस्त 2026 को छात्र दल ने हेडक्वार्टर उत्तर भारत एरिया के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा, AVSM से मुलाकात की। बच्चों ने अब तक की यात्रा के अनुभव साझा किए और बताया कि इस दौरे ने उनके सोचने और दुनिया को देखने के नजरिए में किस तरह बदलाव किया है।
सैन्य अधिकारी से मुलाकात ने छात्रों को भारतीय सेना की कार्यप्रणाली, जिम्मेदारियों और राष्ट्र की सुरक्षा में उसकी भूमिका को समझने का अवसर दिया।
लखनऊ में सूर्या कमांड ने किया स्वागत
इसके बाद छात्र दल लखनऊ पहुंचा, जहां 27 अगस्त 2026 को हेडक्वार्टर सूर्या कमांड में उनका स्वागत किया गया। यहां भी छात्रों को सैन्य जीवन, नेतृत्व और राष्ट्र सेवा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। लखनऊ के प्रमुख स्थलों का भ्रमण कर छात्रों ने उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को भी करीब से जाना।
लखनऊ यात्रा के बाद छात्र दल मुनस्यारी के लिए रवाना हुआ और इसी के साथ 15 दिवसीय राष्ट्रीय एकता दौरे का सफल समापन हुआ।
गांवों से निकलकर बदली सोच, बढ़ा आत्मविश्वास
‘राष्ट्रीय एकता दौरे’ का सबसे बड़ा प्रभाव छात्रों के व्यक्तित्व पर देखने को मिला। इनमें से कई बच्चों के लिए यह उनके गांवों से बाहर की पहली बड़ी यात्रा थी। देश की राजधानी, ऐतिहासिक स्मारकों, सैन्य संस्थानों और संवैधानिक पदाधिकारियों से मुलाकात ने उनके सामने संभावनाओं की एक नई दुनिया खोल दी।
इस यात्रा ने बच्चों के आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत किया। साथ ही उनमें देश की विविधता को समझने और राष्ट्रीय एकता की भावना को और गहराई से महसूस करने का अवसर मिला।
सीमांत युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की मजबूत पहल
भारतीय सेना की ‘सद्भावना’ पहल के अंतर्गत आयोजित यह राष्ट्रीय एकता दौरा केवल भ्रमण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सीमावर्ती क्षेत्रों के युवाओं को देश की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। इस पहल के माध्यम से बच्चों को शिक्षा, अनुशासन, नेतृत्व, तकनीक, संस्कृति और राष्ट्र सेवा के विभिन्न आयामों से परिचित कराया गया।
पहले राष्ट्रीय एकता दौरे की सफलता ने यह संदेश भी दिया कि देश के दूर-दराज और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाली युवा पीढ़ी में प्रतिभा और संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत है तो उन्हें सही अवसर, मार्गदर्शन और व्यापक दुनिया से जुड़ने का मंच देने की।
भारतीय सेना की इस पहल ने एक बार फिर साबित किया कि ‘सद्भावना’ केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि सीमांत क्षेत्रों के युवाओं के भविष्य को मजबूत करने और उनमें राष्ट्र के प्रति विश्वास, गौरव और एकता की भावना विकसित करने का भी माध्यम है।