बरेली। जश्ने-ईद मिलादुन्नबी पर निकले ऐतिहासिक जुलूस-ए-मुहम्मदी में प्रतिबंध के बावजूद डीजे की गूंज और उस पर नाचती-झूमती भीड़ की तस्वीरों ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। पुलिस के 11 डीजे सिस्टम और उन्हें लेकर चल रहे वाहनों को सीज करने के बाद अब दरगाह आला हजरत से भी सख्त कार्रवाई सामने आई है। दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हानी मियां ने जुलूस का नेतृत्व करने वाली अंजुमन खुद्दाम-ए-रसूल की कमेटी भंग कर दी है। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच के लिए नई कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया है।
दरगाह प्रबंधन और उलमा की ओर से जुलूस से पहले ही डीजे पर रोक की हिदायत दी गई थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में डीजे जुलूस का हिस्सा कैसे बने, अब यही सबसे बड़ा सवाल है। दरगाह प्रमुख की ओर से गठित की जाने वाली जांच कमेटी इसकी तह तक जाएगी। कमेटी में शहर के उलमा, बुद्धिजीवियों और सम्मानित लोगों को शामिल किए जाने की तैयारी है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि रोक को लागू कराने में किस स्तर पर चूक हुई और इसकी जिम्मेदारी किसकी थी।
अदब के जुलूस में डीजे ने खड़े किए सवाल
बरेली का जुलूस-ए-मुहम्मदी अपनी ऐतिहासिक परंपरा और अदब-ओ-एहतराम के लिए जाना जाता है। पुराने शहर के हनीफ खान बताते हैं कि वर्षों से जुलूस बेहद सम्मान और अनुशासन के साथ निकाला जाता रहा है। पिछले कुछ वर्षों में डीजे साउंड का चलन बढ़ा है। हर बार उलमा और दरगाह से डीजे नहीं लाने की हिदायत दी जाती है, लेकिन इसके बावजूद कुछ युवा डीजे के साथ जुलूस में पहुंच जाते हैं। इस बार तेज आवाज में बजते डीजे और उनके सामने नाचती-झूमती भीड़ की तस्वीरें सामने आने के बाद सवाल और तीखे हो गए। चर्चा इस बात को लेकर भी है कि जब पहले से प्रतिबंध घोषित था तो जुलूस की व्यवस्था संभालने वाले जिम्मेदार इसे प्रभावी ढंग से लागू क्यों नहीं करा सके।
पुलिस ने रात में कसा शिकंजा, 11 डीजे सीज
पुलिस ने इस बार डीजे को लेकर कार्रवाई भी की। कोहाड़ापीर से दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हानी मियां और सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां की मौजूदगी में रवाना हुए जुलूस में शामिल चार डीजे सिस्टम और वाहन सीज किए गए। वहीं तिलियापुर क्षेत्र से सीबीगंज स्थित मदरसा जामियातुर्रजा की ओर जाने वाले जुलूस में शामिल सात डीजे पर कार्रवाई की गई। इस तरह पुलिस ने कुल 11 डीजे और उनसे जुड़े वाहनों पर शिकंजा कसा। कार्रवाई के बाद दरगाह से जुड़े जिम्मेदारों, उलमा और समाज के बीच भी इस मुद्दे को लेकर हलचल तेज हो गई।
आयोजकों की जवाबदेही पर भी उठी उंगली
सबसे बड़ा सवाल आयोजकों की जवाबदेही को लेकर खड़ा हुआ है। दरगाह और उलमा की स्पष्ट मनाही के बाद भी डीजे जुलूस में शामिल होते रहे तो उन्हें रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी? क्या आयोजकों के स्तर पर निगरानी कमजोर रही या निर्देशों की अनदेखी की गई? प्रस्तावित जांच में इन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे। इसी घटनाक्रम के बीच दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हानी मियां की ओर से अंजुमन खुद्दाम-ए-रसूल की कमेटी भंग करने के फैसले को भविष्य के जुलूसों में अनुशासन कायम रखने की दिशा में बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
कहीं जुलूस को बदनाम करने की साजिश तो नहीं
जांच का दायरा केवल लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा। दरगाह से जुड़े जिम्मेदार इस पहलू की भी पड़ताल कराने की बात कह रहे हैं कि कहीं जानबूझकर ऐसी गतिविधियां कर ऐतिहासिक जुलूस की छवि और उसके अदब-ओ-एहतराम को नुकसान पहुंचाने की कोशिश तो नहीं की गई। दरगाह स्तर पर अब आगामी जुलूसों के लिए और कड़े नियम तथा निगरानी व्यवस्था बनाने की तैयारी है, ताकि प्रतिबंधित डीजे या ऐसी किसी अन्य गतिविधि के कारण जुलूस की धार्मिक गरिमा प्रभावित न हो।