बरेली। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कृष्ण पाल सिंह के कार्यकाल की समाप्ति से ठीक एक दिन पहले रविवार को उनका विदाई समारोह हंगामे की भेंट चढ़ते-चढ़ते बचा। एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने समारोह के बीच नारेबाजी करते हुए कुलपति को घेर लिया। कार्यकर्ताओं ने करीब एक साल पहले आंदोलन के दौरान दर्ज पांच एफआईआर वापस लेने के साथ अटल सभागार, भर्ती, पेड़ों की कटाई और अन्य कथित अनियमितताओं पर जवाब मांगा। कुलपति को सुरक्षा घेरे में बाहर ले जाने के दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन की ओर से ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल के सभागार में कुलपति प्रो. केपी सिंह का विदाई समारोह आयोजित किया गया था। कार्यक्रम चल ही रहा था कि एबीवीपी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता वहां पहुंच गए। उन्होंने कुलपति के कार्यकाल को लेकर सवाल उठाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय में प्रस्तावित अटल सभागार के निर्माण में कथित अनियमितता की जांच की मांग की। इसके अलावा भर्ती प्रक्रिया, विश्वविद्यालय परिसर में पेड़ों की कटाई और अन्य कथित मामलों को लेकर भी सवाल उठाए। देखते ही देखते बहस तेज हो गई और समारोह स्थल का माहौल गरमा गया।
बाहर निकलने लगे कुलपति तो रास्ता रोकने की कोशिश
हंगामा बढ़ता देख चीफ प्रॉक्टर, सुरक्षा प्रभारी, शिक्षक और विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मी सक्रिय हो गए। कुलपति को सुरक्षा के बीच सभागार से बाहर ले जाने का प्रयास किया गया तो कार्यकर्ताओं ने उन्हें रोककर अपनी बात सुनने की मांग की। इसी दौरान धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बन गई। आरोप है कि कार्यकर्ताओं ने पहले प्लेसमेंट सेल का दरवाजा बंद कर दिया। कुलपति बाहर निकलकर कार तक पहुंचे तो वहां भी कार्यकर्ताओं ने उनका घेराव कर लिया और कार का दरवाजा बंद कर जवाब देने की मांग की। हालांकि विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मियों और शिक्षकों ने स्थिति संभाली और कोई गंभीर अप्रिय घटना नहीं हुई।
हम पर दर्ज पांच मुकदमे वापस हों
एबीवीपी के पूर्व पदाधिकारी श्रेयांश ने कुलपति के सामने कार्यकर्ताओं की मांग रखी। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष आंदोलन के दौरान परिषद के कार्यकर्ताओं पर पांच एफआईआर दर्ज कराई गई थीं। कुलपति का कार्यकाल समाप्त होने से पहले इन मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाए। कार्यकर्ताओं ने कुलपति से उनके कार्यकाल में हुई कथित अनियमितताओं का भी हिसाब मांगा। अटल सभागार समेत विभिन्न मामलों की जांच कराने की मांग उठाई गई, जिसका मौके पर मौजूद अन्य कार्यकर्ताओं ने भी समर्थन किया।
कुलपति ने दिया आश्वासन, फिर शांत हुआ हंगामा
विरोध के बीच कुलपति प्रो. केपी सिंह ने कार्यकर्ताओं से बातचीत की। उन्होंने कहा कि हर कार्यकाल में कुछ अच्छा और कुछ बुरा होता है। कार्यकर्ताओं पर दर्ज एफआईआर के मामले में उन्होंने शपथ पत्र पर लिखकर देने और मुकदमे हटवाने की दिशा में प्रयास का आश्वासन दिया। इसके बाद कार्यकर्ता शांत हुए और कुलपति स्वयं उनके साथ दोबारा कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। कुछ देर बाधित रहने के बाद विदाई समारोह फिर शुरू हुआ। खास बात यह रही कि विरोध कर रहे एबीवीपी कार्यकर्ता बाद में सभागार की पहली पंक्ति में बैठकर कार्यक्रम में शामिल हुए।
जाते-जाते बोले केपी सिंह- यह विदाई कभी नहीं भूलूंगा
विदाई समारोह में कुलपति प्रो. केपी सिंह ने पूरे घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि एबीवीपी कार्यकर्ताओं की ओर से मिली इस विदाई को वह कभी नहीं भूलेंगे। उनके इस वक्तव्य के बाद कार्यक्रम आगे बढ़ा और उन्हें औपचारिक विदाई दी गई। प्रो. कृष्ण पाल सिंह का कुलपति के रूप में कार्यकाल 31 अगस्त को पूरा हो रहा है। ऐसे में कार्यकाल समाप्त होने से महज एक दिन पहले विदाई समारोह में हुआ यह विरोध विश्वविद्यालय परिसर में चर्चा का विषय बन गया।