बरेली। शेरगढ़ में किच्छा नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज कटान ने जल जीवन मिशन के करोड़ों रुपये पर पानी फेर दिया। बैरमनगर गांव में करीब 3.97 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जा रही पेयजल टंकी नदी के कटान की चपेट में आकर भरभराकर नदी में समा गई। पिछले कई दिनों से टंकी के आसपास कटान का खतरा बना हुआ था, लेकिन नदी का बहाव बढ़ने के साथ हालात बिगड़ते चले गए।
नदी का जलस्तर बढ़ा तो बढ़ता गया खतरा
मामला शेरगढ़ ब्लॉक के बैरमनगर गांव का है। यहां जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए टंकी का निर्माण कराया जा रहा था। टंकी का निर्माण किच्छा नदी के बेहद करीब कराया जा रहा था। पिछले कुछ दिनों से नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ कटान शुरू हो गया था। पानी टंकी की बाउंड्रीवाल के अंदर तक पहुंच गया था।
देखते ही देखते नदी में समा गई टंकी
नदी का कटान लगातार बढ़ता गया और जमीन खिसकने लगी। इसी बीच टंकी का बड़ा हिस्सा किच्छा नदी की धारा में समा गया। नदी के तेज बहाव के आगे निर्माणाधीन टंकी टिक नहीं सकी। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। अब आशंका है कि अगर कटान इसी रफ्तार से जारी रहा तो टंकी का बचा हुआ कमरा भी नदी में समा सकता है।
महंगे उपकरण पहले ही बचा लिए गए
गनीमत रही कि विभाग ने खतरे को भांपते हुए परियोजना स्थल पर रखे कई जरूरी और महंगे उपकरण पहले ही वहां से हटवा लिए थे। जनरेटर, सौर ऊर्जा पैनल, पंप, डोमर और स्काडा सिस्टम समेत अन्य महत्वपूर्ण सामान को सुरक्षित स्टोर में पहुंचा दिया गया था। इससे लाखों रुपये के उपकरण नदी में बहने से बच गए। हालांकि, करोड़ों की लागत से तैयार हो रही पानी की टंकी को नहीं बचाया जा सका।
करोड़ों की परियोजना पर उठे सवाल
नदी के कटान में टंकी के समा जाने के बाद जल जीवन मिशन की इस परियोजना पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। जिस जगह निर्माण कराया जा रहा था, वहां पहले से ही नदी के कटान का खतरा बना हुआ था। ऐसे में टंकी को नदी के इतने करीब बनाए जाने को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि निर्माण से पहले बाढ़ और कटान के खतरे का कितना आकलन किया गया था।