बरेली। राजस्थान के जयपुर में ईंट भट्ठे पर मजदूरी के दौरान शुरू हुई दो कामगारों की प्रेम कहानी आखिरकार बरेली में सात फेरों के बंधन तक पहुंच गई। फरीदपुर निवासी तोताराम ने हरदोई के संडीला की रहने वाली रजिया से अगस्त्य मुनि आश्रम में हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार विवाह किया। विवाह से पहले रजिया ने धर्म परिवर्तन किया और उनका नया नाम गौरी देवी रखा गया। आश्रम के आचार्य केके शंखधार ने दोनों का विवाह संपन्न कराया।
रजिया के मुताबिक करीब चार साल पहले वह और तोताराम राजस्थान के जयपुर जिले में एक ईंट भट्ठे पर काम करते थे। साथ काम करने के दौरान दोनों की जान-पहचान हुई और फिर दोस्ती बढ़ने लगी। दोनों ने एक-दूसरे के मोबाइल नंबर लिए और लगातार बातचीत होने लगी। समय के साथ दोस्ती प्रेम में बदल गई और दोनों ने विवाह कर साथ जिंदगी बिताने का फैसला कर लिया।
तोताराम बोले- हिंदू धर्म में पहले से थी रजिया की आस्था
तोताराम का कहना है कि बातचीत के दौरान उन्हें पता चला कि रजिया की हिंदू धर्म में आस्था है और वह भगवान शिव की पूजा करना चाहती थीं। उनका दावा है कि परिवार इस रिश्ते और मूर्ति पूजा के पक्ष में नहीं था। इसके बाद दोनों ने परिवार से अलग होकर विवाह करने और अपना घर बसाने का निर्णय लिया।
अगस्त्य मुनि आश्रम पहुंचे, फिर लिए सात फेरे
शनिवार को तोताराम और रजिया बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम पहुंचे। यहां उन्होंने आचार्य केके शंखधार को अपने प्रेम संबंध और विवाह करने के फैसले की जानकारी दी। आचार्य ने दोनों के बालिग होने से संबंधित प्रमाणपत्र देखने के बाद विवाह की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। रजिया ने धर्म परिवर्तन किया, जिसके बाद उनका नाम गौरी देवी रखा गया। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दोनों ने सात फेरे लिए और एक-दूसरे को जीवनसाथी स्वीकार किया।
गौरी ने परिवार के कुछ लोगों से जताया जान का खतरा
रजिया उर्फ गौरी का कहना है कि उन्होंने अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन और विवाह किया है। उन्होंने खुद को भगवान शिव की भक्त बताते हुए कहा कि वह हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार जीवन बिताना चाहती हैं। साथ ही उन्होंने अपने परिवार के कुछ लोगों से जान का खतरा होने का दावा भी किया है। आचार्य केके शंखधार के मुताबिक नवदंपती की सुरक्षा को लेकर संबंधित अधिकारियों से शिकायत कर आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया जाएगा।