बरेली। मेरे सपनों का भारत अभियान के तहत प्राथमिक विद्यालय परतापुर चौधरी में नौनिहालों ने अपनी कल्पनाओं को रंगों और विचारों के जरिए कागज पर उतारा। किसी ने स्वच्छ और सुंदर भारत का सपना सजाया तो किसी की कल्पना में ऐसा देश उभरा, जहां हर बच्चे को अच्छी शिक्षा, हर परिवार को बेहतर सुविधाएं और समाज में आपसी भाईचारा हो। बच्चों की रचनाओं ने यह संदेश दिया कि देश का भविष्य केवल बड़े सपनों से नहीं, बल्कि बचपन की सोच से भी आकार लेता है।
इंचार्ज अध्यापक इन्द्रा जहोरि के मार्गदर्शन में बच्चों ने गढ़ी तस्वीर
विद्यालय की इंचार्ज अध्यापक इन्द्रा जहोरि के मार्गदर्शन में ‘मेरे सपनों का भारत’ अभियान को लेकर बच्चों को अपनी कल्पना और सोच को अभिव्यक्त करने का अवसर दिया गया। बच्चों ने अपनी समझ के अनुसार भारत के भविष्य की तस्वीर कागज पर उकेरी और बताया कि वे अपने देश को आने वाले समय में किस रूप में देखना चाहते हैं।
आलिया ने सपनों में देखा बेहतर भारत
कक्षा तीन की छात्रा आलिया ने अपने विचारों और रचनात्मकता के माध्यम से भारत के बेहतर भविष्य की कल्पना प्रस्तुत की। उसकी प्रस्तुति में यह सोच दिखाई दी कि देश को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा, विकास और सकारात्मक सोच जरूरी है।
अलेना की कल्पना में भविष्य का भारत
कक्षा दो की अलेना ने भी ‘मेरे सपनों का भारत’ अभियान में उत्साह के साथ भाग लिया। छोटी उम्र में देश के भविष्य को लेकर उसकी कल्पना ने यह दिखाया कि बच्चों के मन में राष्ट्र और समाज को लेकर विचार बचपन से ही आकार लेने लगते हैं।
गुलब्शा ने दिखाई विकास की तस्वीर
कक्षा पांच की गुलब्शा ने अपने सपनों के भारत को रचनात्मक अंदाज में सामने रखा। उसकी प्रस्तुति में बेहतर भविष्य और विकास की उम्मीद दिखाई दी। विद्यालय में बच्चों को अपनी बात रखने के लिए मिला मंच उनकी कल्पनाशक्ति को दिशा देने वाला साबित हुआ।
उमुल और सानिफा ने भी रंगों में भरे अपने सपने
कक्षा पांच की उमुल और सानिफा ने भी अभियान में भाग लेकर भारत को लेकर अपनी कल्पनाओं को सामने रखा। दोनों छात्राओं की प्रस्तुतियों में अपने आसपास के समाज और देश को बेहतर देखने की इच्छा नजर आई। बच्चों ने अपनी सोच को बिना किसी झिझक के रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किया।
मिस्बा ने भी रखी अपने सपनों के भारत की तस्वीर
कक्षा तीन की छात्रा मिस्बा ने भी ‘मेरे सपनों का भारत’ अभियान में भाग लेकर अपनी कल्पना को कागज पर उतारा। उसकी प्रस्तुति में बचपन की सहज सोच के साथ बेहतर भारत की उम्मीद दिखाई दी।
बचपन की सोच में छिपा देश के भविष्य का सपना
‘मेरे सपनों का भारत’ जैसे अभियान बच्चों को केवल चित्र बनाने या गतिविधि में शामिल होने का अवसर नहीं देते, बल्कि उन्हें अपने देश, समाज और भविष्य के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करते हैं। प्राथमिक विद्यालय परतापुर चौधरी के बच्चों की प्रस्तुतियों में अलग-अलग कल्पनाएं थीं, लेकिन संदेश एक था—भारत ऐसा हो जहां विकास के साथ शिक्षा, स्वच्छता, समान अवसर और बेहतर जीवन की उम्मीद हर बच्चे के हिस्से में आए।
विद्यालय ने बच्चों को दिया सपनों को आवाज देने का मंच
प्राथमिक विद्यालय परतापुर चौधरी में आयोजित यह गतिविधि बच्चों की रचनात्मकता के साथ उनकी सामाजिक समझ को सामने लाने का माध्यम बनी। इंचार्ज अध्यापक इन्द्रा जहोरि के मार्गदर्शन में आलिया, अलेना, गुलब्शा, उमुल, सानिफा और मिस्बा ने अपने-अपने अंदाज में ‘मेरे सपनों का भारत’ की तस्वीर पेश की। इन नन्हीं कल्पनाओं में दिखाई देने वाला भारत आने वाली पीढ़ी की उम्मीदों और सोच की झलक भी देता है।