bareillyबैठक करतीं बीडीए उपाध्यक्ष।

बरेली। शहर में नया अस्पताल या नर्सिंग होम खोलने की तैयारी है तो सिर्फ बिल्डिंग और मेडिकल सुविधाएं जुटाना काफी नहीं होगा। अस्पताल कितने बेड का है, भूखंड कितना बड़ा है और सामने की सड़क कितनी चौड़ी है, इन सबका हिसाब देना होगा। गुरुवार को बीडीए और आईएमए के प्रतिनिधि आमने-सामने बैठे तो अस्पतालों के नक्शे से लेकर फायर एनओसी और कंप्लीशन सर्टिफिकेट तक कई अहम नियम सामने आए।

बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पांडे की अध्यक्षता में हुए विकास संवाद में सबसे अहम चर्चा अस्पताल और नर्सिंग होम के लिए जमीन और सड़क की अनिवार्यता पर हुई। बैठक में दी गई जानकारी के मुताबिक 50 बेड तक के नर्सिंग होम या छोटे अस्पताल के लिए कम से कम 300 वर्गमीटर का भूखंड और 12 मीटर चौड़ी सड़क जरूरी है। वहीं 50 से ज्यादा बेड का अस्पताल बनाने के लिए 3000 वर्गमीटर भूखंड और 18 मीटर चौड़ी सड़क का प्रावधान बताया गया।

बिना बेड वाले मेडिकल सेंटर के लिए भी तय है सीमा

नॉन-बेडेड मेडिकल एस्टैब्लिशमेंट के लिए भी नियम तय हैं। ऐसे चिकित्सा संस्थान के लिए न्यूनतम 100 वर्गमीटर भूखंड और नौ मीटर चौड़ी सड़क का प्रावधान बताया गया। डॉक्टरों ने अलग-अलग भू-उपयोग में अस्पताल और नर्सिंग होम की अनुमति को लेकर सवाल किए, जिस पर बीडीए अधिकारियों ने नियमों की स्थिति स्पष्ट की। बैठक में आईएमए के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष समेत करीब आठ प्रतिनिधि पहुंचे। डॉक्टरों ने जोनिंग रेगुलेशन, भूखंड के सब-डिवीजन और अलग-अलग भूखंडों के समामेलन से जुड़े सवाल उठाए। अस्पताल के लिए जमीन का इस्तेमाल किस स्थिति में किया जा सकता है और नक्शा स्वीकृत कराने के दौरान किन नियमों का पालन करना होगा, इस पर विस्तार से चर्चा हुई।

फायर NOC से बायोमेडिकल वेस्ट तक देना होगा ध्यान

अस्पताल का भवन तैयार कर लेना ही पूरी प्रक्रिया नहीं है। चिकित्सा संस्थानों को फायर एनओसी, बायोमेडिकल और ठोस कचरा प्रबंधन, एसटीपी/ डब्ल्यूडब्ल्यूटीपी की कार्यशीलता और दिव्यांगजनों के लिए बाधारहित एवं सुरक्षित प्रवेश जैसी शर्तों का भी पालन करना होगा। विमानन सुरक्षा से जुड़े जरूरी नियमों का मुद्दा भी बैठक में उठा। बैठक में निर्माण पूर्णता प्रमाणपत्र को लेकर भी स्थिति साफ की गई। बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पांडे ने कहा कि निर्माण पूरा होने के बाद कंप्लीशन सर्टिफिकेट लेने की प्रक्रिया समय से शुरू की जाए। जरूरी प्रमाणपत्र और अनुमति हासिल किए बिना भवन का कब्जा देने से बचने को कहा गया।

प्लानिंग के वक्त ही देख लें नियम, बाद में न अटके अस्पताल का प्रोजेक्ट

बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पांडे ने चिकित्सा संस्थानों से कहा कि अस्पताल की प्लानिंग के शुरुआती चरण में ही वैधानिक जरूरतों को ध्यान में रखा जाए। आवेदन के साथ सभी जरूरी दस्तावेज लगाए जाएं और जिन विभागों की एनओसी जरूरी है, उन्हें समय रहते हासिल किया जाए। इससे नक्शे और निर्माण से जुड़े मामलों में बाद में आने वाली अड़चनों और देरी को कम किया जा सकेगा। गुरुवार सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पांडे की अध्यक्षता में यह संवाद चला। उन्होंने कहना है कि ऐसे संवाद के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों की समस्याएं सीधे सुनकर नियमों के दायरे में समाधान निकालने और विकास से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी कम करने की कोशिश की जा रही है।

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