हेल्थ डेस्क। बदलती जीवनशैली, बढ़ता मोटापा और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पहले जहां यह समस्या सीमित लोगों तक थी, वहीं अब युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि फैटी लिवर सिर्फ लिवर तक सीमित बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी का कारण भी बन सकती है। इनमें सबसे प्रमुख है विटामिन D की कमी।
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) में लिवर में अत्यधिक फैट जमा हो जाता है। यह स्थिति मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस, खराब खानपान और निष्क्रिय जीवनशैली से जुड़ी होती है। कई शोधों में यह बात सामने आई है कि फैटी लिवर शरीर में विटामिन D के निर्माण और उपयोग की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
कैसे घटता है विटामिन D का स्तर?
विशेषज्ञ बताते हैं कि लिवर विटामिन D को उसके सक्रिय रूप में बदलने का महत्वपूर्ण काम करता है। यदि लिवर में फैट जमा हो जाए और सूजन बढ़ जाए तो यह प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। ऐसे में व्यक्ति पर्याप्त धूप लेने और विटामिन D युक्त भोजन करने के बावजूद इसकी कमी का शिकार हो सकता है। मोटापा भी इस समस्या को बढ़ाता है। विटामिन D वसा में घुलने वाला विटामिन है और शरीर में अतिरिक्त फैट होने पर यह वसा ऊतकों में फंस सकता है। इससे रक्त में इसकी उपलब्धता कम हो जाती है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
फैटी लिवर और विटामिन D की कमी लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के रह सकती है। हालांकि कुछ लोगों में लगातार थकान, मांसपेशियों में कमजोरी, शरीर में दर्द, सुस्ती, ऊर्जा की कमी और काम में मन न लगना जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
एक-दूसरे से जुड़ी हैं दोनों समस्याएं
डॉक्टरों के मुताबिक विटामिन D की कमी से शरीर में सूजन, इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबॉलिक समस्याएं बढ़ सकती हैं। ये सभी कारक फैटी लिवर की स्थिति को और खराब कर सकते हैं। यही वजह है कि दोनों समस्याएं अक्सर एक-दूसरे से जुड़ी हुई नजर आती हैं।
फैटी लिवर से बचने के उपाय
फैटी लिवर की समस्या को नियंत्रित करने के लिए वजन कम करना सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति अपने कुल वजन का 7 से 10 प्रतिशत तक भी कम कर ले, तो लिवर में जमा फैट और सूजन में उल्लेखनीय कमी आ सकती है इसके अलावा प्रोसेस्ड फूड, मीठे पेय पदार्थ, तली-भुनी चीजों और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट से दूरी बनाना जरूरी है। आहार में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, लीन प्रोटीन और हेल्दी फैट्स शामिल करने चाहिए।
रोजाना करें व्यायाम और लें पर्याप्त नींद
नियमित व्यायाम, तेज चाल से चलना, साइकिलिंग, योग और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग लिवर की सेहत को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकते हैं। साथ ही पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और शराब से दूरी भी बेहद जरूरी है। यदि जांच में विटामिन D की कमी पाई जाती है, तो डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट्स, धूप और विटामिन D युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। समय रहते ध्यान देने से न केवल लिवर स्वस्थ रह सकता है बल्कि शरीर की ऊर्जा, रोग प्रतिरोधक क्षमता और समग्र स्वास्थ्य में भी सुधार हो सकता है।