बरेली। UPI भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने के विरोध में गांधी जयंती पर शुक्रवार को व्यापारी सड़कों पर उतर आए। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के आह्वान पर व्यापारियों ने शाहदाना चौराहे से श्यामगंज मार्केट तक जन आक्रोश शांति मार्च निकाला। हाथों में तख्तियां लेकर व्यापारियों ने सरकार के फैसले के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान सड़क पर बारकोड और UPI QR कोड की होली जलाकर विरोध जताया। व्यापारियों ने दो अक्टूबर को सांकेतिक रूप से ‘नो UPI डे’ मनाते हुए दुकानदारों और ग्राहकों से नकद भुगतान करने की अपील की।
व्यापारियों का कहना है कि UPI पर MDR लगाने से छोटे और मध्यम कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। सितंबर 2026 में जारी नए UPI फ्रेमवर्क के तहत 2000 रुपये से अधिक के व्यक्ति से व्यापारी (P2M) लेनदेन पर 0.4 फीसदी MDR लागू किए जाने का विरोध किया जा रहा है। हालांकि, 2000 रुपये तक के भुगतान और तय शर्तों के तहत छोटे व्यापारियों के लेनदेन पर यह शुल्क लागू नहीं है। सरकार के मुताबिक, MDR ग्राहक से वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है।
पहले से GST दे रहे व्यापारी, अब अतिरिक्त बोझ की चिंता
महानगर महामंत्री राजेश जसोरिया ने कहा कि व्यापारी पहले से ही 18 फीसदी जीएसटी दे रहे हैं। ऐसे में 2000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर 0.4 फीसदी MDR लगाने से कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस फैसले से व्यापारियों की लागत बढ़ेगी और इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष दुर्गेश खटवानी ने कहा कि ऑनलाइन कंपनियों और ई-कॉमर्स के बढ़ते कारोबार के कारण स्थानीय दुकानदारों का मुनाफा पहले ही कम हो गया है। ऐसे में MDR का खर्च भी व्यापारियों पर आने से छोटे कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
10 से 15 रुपये के मुनाफे पर भी पड़ेगा असर
मुकेश खटवानी समेत अन्य व्यापारियों ने कहा कि थोक कारोबार में कई बार दो से तीन हजार रुपये के माल की बिक्री पर महज 10 से 15 रुपये का मुनाफा होता है। ऐसे में UPI लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगने से पहले से कम मार्जिन में काम कर रहे व्यापारियों का मुनाफा और घटेगा। इसका सीधा असर छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा। व्यापारियों ने UPI पर MDR लागू करने की व्यवस्था वापस लेने की मांग की। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बजाय इस तरह के शुल्क से व्यापारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।