up newsपुलिस की गिरफ्त में आरोपी

बरेली। 35 लाख रुपये की बरामदगी के बाद उजागर हुए हवाला कारोबार में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। फरार चल रहे गिरोह के तीसरे सदस्य और मुख्य आरोपियों में शामिल मोईन अली को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी से 3 लाख रूपये बरामद किए हैं। पुलिस का मानना है कि मोईन की गिरफ्तारी से हवाला नेटवर्क, दुबई कनेक्शन और करोड़ों रुपये के लेन-देन के पूरे खेल से पर्दा उठ सकता है।

बारादरी पुलिस ने रविवार को हजियापुर निवासी जमीर अहमद और माधोवाड़ी निवासी जगदीश चोटिया को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 35 लाख रुपये नकद बरामद किए थे। पूछताछ में सामने आया था कि जमीर अहमद और उसका तहेरा भाई मोईन अली लोगों की नजरों में जरी का कारोबार करते थे, लेकिन उसी की आड़ में हवाला की रकम को ठिकाने लगाने का काम कर रहे थे। कार्रवाई के दौरान मोईन फरार हो गया था, जिसकी तलाश में पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही थीं। लोकेशन ट्रेस होने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

दुबई में बैठे जीशान के इशारे पर चलता था खेल

पूछताछ में जमीर ने खुलासा किया था कि वर्ष 2020 में उसकी मुलाकात इंटरनेट मीडिया के माध्यम से जीशान अली नामक युवक से हुई थी। जीशान ने खुद को दुबई में रहने वाला बताया और बैंक खाते के जरिए मोटे मुनाफे का लालच दिया। इसके बाद जमीर और मोईन ने केजीएन नाम से फर्म का खाता खुलवाया और उसमें बड़ी मात्रा में रकम मंगानी शुरू कर दी। जांच में यह भी सामने आया कि खाते में आने वाली रकम निकालने का जिम्मा दिल्ली के चांदनी चौक निवासी धम्माराम और लालचंद्र को दिया गया था। बाद में पुलिस की नजरों से बचने के लिए माधोवाड़ी निवासी जगदीश चोटिया को भी इस नेटवर्क में शामिल कर लिया गया। उसे रकम पहुंचाने के एवज में प्रति लाख 300 रुपये कमीशन मिलता था।

डिलीट किया डेटा, अब फॉरेंसिक खोलेगी राज

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों जमीर और जगदीश ने अपने मोबाइल फोन का अधिकांश डेटा डिलीट कर दिया था। आशंका है कि उसी डेटा में हवाला नेटवर्क और अन्य सदस्यों से जुड़े अहम सुराग मौजूद हैं। इसलिए मोबाइल फोन फॉरेंसिक साइंस लैब भेजे गए हैं, जहां से डिलीट डेटा रिकवर कराया जा रहा है। इसके अलावा आरोपियों के मोबाइल फोन का इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड (आईपीडीआर) भी मंगाया गया है। इससे यह पता लगाया जाएगा कि वे व्हाट्सएप कॉल और इंटरनेट के माध्यम से किन-किन लोगों और किन देशों के नेटवर्क के संपर्क में थे। पुलिस को उम्मीद है कि इससे दुबई में बताए जा रहे जीशान अली और अन्य संदिग्धों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी।

सीडीएम में जमा रकम का पैटर्न भी जांच के घेरे में

पुलिस अब यह भी खंगाल रही है कि रकम किन-किन कैश डिपॉजिट मशीनों (सीडीएम) के जरिए खातों में जमा की गई। जांच टीम यह पता लगा रही है कि जमा रकम एक ही बैंक की मशीनों से आई या अलग-अलग बैंकों से। साथ ही जिन क्षेत्रों से कैश जमा किया गया, उनकी भौगोलिक और व्यावसायिक पृष्ठभूमि भी खंगाली जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि रकम जमा होने के पैटर्न से यह स्पष्ट हो सकेगा कि हवाला का पैसा आखिर कहां से आ रहा था और इसके पीछे कितना बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। मोईन अली की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब गिरोह के बाकी सदस्यों और कथित दुबई कनेक्शन तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है।

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