गाजियाबाद। प्रदेश में महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावों के बीच ट्रांस हिंडन क्षेत्र से आई एक घटना ने सिस्टम की हकीकत उजागर कर दी है। लगातार छेड़छाड़, अश्लील टिप्पणियों और “उठाकर ले जाएंगे” जैसी खौफनाक धमकियों से तंग आकर 12वीं की एक छात्रा ने अपनी पढ़ाई तक छोड़ दी। परिवार इस कदर सहमा हुआ है कि घर से बाहर निकलना भी जोखिम भरा लगने लगा है। यह मामला सिर्फ एक लड़की की मजबूरी नहीं, बल्कि पूरे सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
रास्ते में घेरकर छेड़छाड़, रोज बनता था निशाना
थाना टीलामोड़ क्षेत्र के गरिमा गार्डन की रहने वाली छात्रा ने 26 अप्रैल को छह आरोपियों—आरिफ, साकिब, इमरान, नफीस, आसिफ और जावेद—के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता के मुताबिक, जब भी वह स्कूल आती-जाती थी, आरोपी रास्ते में उसे घेर लेते थे। गंदी फब्तियां कसना, अश्लील इशारे करना और पीछा करना उनकी रोजमर्रा की हरकत बन चुकी थी। हालात इतने बिगड़ गए कि छात्रा का अकेले घर से निकलना तक बंद हो गया।
“उठाकर ले जाएंगे” की धमकी से दहशत का माहौल
पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि आरोपियों ने न सिर्फ उसे बल्कि उसके पूरे परिवार को भी खुली धमकी दी। आरोपियों ने कहा कि वे उसे रास्ते से उठाकर ले जाएंगे और ऐसा हाल करेंगे कि वह किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेगी। इसके साथ ही परिवार को घर छोड़ने की धमकी दी गई। इन धमकियों ने पूरे परिवार को मानसिक रूप से तोड़ दिया है, जिससे वे लगातार भय के साए में जीने को मजबूर हैं।
पुरानी रंजिश बनी उत्पीड़न की वजह
पुलिस जांच में सामने आया कि करीब एक महीने पहले छात्रा के परिवार और आरोपियों के बीच विवाद हुआ था। उस मामले में आरोपी पक्ष के दो लोगों को जेल भी भेजा गया था। अब उसी रंजिश का बदला लेने के लिए छात्रा को निशाना बनाया जा रहा है। यह घटना बताती है कि व्यक्तिगत दुश्मनी किस तरह महिलाओं की सुरक्षा पर सीधा हमला बन जाती है।
पुलिस की कार्रवाई और दावे, लेकिन जमीन पर डर कायम
एसीपी शालीमार अतुल कुमार सिंह के अनुसार, 26 अप्रैल को छात्रा की शिकायत पर तत्काल केस दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, सवाल यह है कि जब पहले से विवाद और शिकायतें थीं, तो समय रहते सख्ती क्यों नहीं दिखाई गई? क्या कार्रवाई सिर्फ घटना के बाद ही होगी?
महिला सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
गाजियाबाद में एंटी रोमियो टीम, मिशन शक्ति केंद्र, महिला हेल्प डेस्क और परिवार परामर्श केंद्र जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। कागजों पर ये टीमें 24 घंटे सक्रिय बताई जाती हैं, लेकिन सड़कों पर हो रही ऐसी घटनाएं इन दावों को कमजोर साबित करती हैं। जब एक छात्रा को पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर होना पड़े, तो यह सिर्फ कानून-व्यवस्था की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता मानी जाएगी।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे खौफनाक मामले
यह कोई पहली घटना नहीं है। हाल के महीनों में गाजियाबाद में कई मामलों ने लोगों को झकझोर दिया है। इंदिरापुरम में दिनदहाड़े शिक्षिका से छेड़छाड़, खोडा में छात्राओं से जबरन नंबर लेना और होटल में युवती के साथ अभद्रता जैसे मामले पहले ही सामने आ चुके हैं। इन घटनाओं की पुनरावृत्ति यह दिखाती है कि मनचलों के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं।
निष्कर्ष: डर के साए में शिक्षा और सपने
यह घटना सिर्फ एक छात्रा की कहानी नहीं, बल्कि उस सामाजिक माहौल का आईना है जहां लड़कियां अपने सपनों से पहले अपनी सुरक्षा के बारे में सोचने को मजबूर हैं। सवाल यह है कि क्या मिशन शक्ति जैसे अभियान जमीनी स्तर पर असर दिखा पाएंगे या फिर ऐसे ही मामलों के बीच उनकी सच्चाई बार-बार उजागर होती रहेगी?