बरेली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप उत्तर प्रदेश में डेयरी कारोबार को गांव की चौखट से बड़े उद्योग तक पहुंचाने की कवायद तेज हो गई है। गुरुवार को आईवीआरआई के स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित ‘डेयरी कॉन्क्लेव-स्वर्णिम दुग्धामृत संवाद समागम’ में बरेली, मुरादाबाद और लखनऊ मंडल को प्रदेश के बड़े डेयरी हब के रूप में विकसित करने की तैयारी की गई है।
तीनों मंडलों में ₹6,947 करोड़ के निवेश प्रस्तावों से करीब 11 हजार लोगों को नए रोजगार मिलेंगे। कॉन्क्लेव में 1500 से अधिक पशुपालक, दुग्ध उत्पादक, उद्यमी, निवेशक और विशेषज्ञ शामिल हुए। पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि सरकार का फोकस केवल दुग्ध उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। दूध के प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन, कोल्ड चेन और डेयरी उद्योग की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे पशुपालकों की आमदनी बढ़ने के साथ महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। उन्होंने कहा कि कृषि और पशुपालन की मजबूत जमीन वाले बरेली, मुरादाबाद और लखनऊ मंडल आने वाले समय में प्रदेश के प्रमुख डेयरी हब बन सकते हैं। डेयरी सेक्टर की यह ताकत उत्तर प्रदेश की वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
बरेली में ₹2712 करोड़, मुरादाबाद में ₹2085 करोड़ के प्रस्ताव
दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. ने निवेश और रोजगार का खाका सामने रखते हुए बताया कि ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के तहत बरेली मंडल में ₹2712 करोड़, मुरादाबाद मंडल में ₹2085 करोड़ और लखनऊ मंडल में ₹2150 करोड़ के निवेश प्रस्ताव आए हैं। यानी तीनों मंडलों में कुल निवेश प्रस्ताव करीब ₹6,947 करोड़ के हैं। इन परियोजनाओं से लगभग 11 हजार नए रोजगार सृजित होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत तीनों मंडलों के करीब 2200 लाभार्थियों को डीबीटी के जरिये ₹12 करोड़ से अधिक का अनुदान दिया जा चुका है। दुग्ध नीति-2022 के तहत भी विभिन्न परियोजनाओं के लिए करीब ₹11 करोड़ की अनुदान राशि जारी की गई है।
गांव में ही बिके दूध, हर ग्राम में समिति बनाने पर जोर
डीएम अविनाश सिंह ने कहा कि दुग्धशाला विकास के 50 वर्ष पूरे होने पर आयोजित यह कॉन्क्लेव केवल सम्मेलन नहीं, बल्कि पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रयास है कि प्रत्येक गांव में दुग्ध विकास समिति स्थापित हो, ताकि पशुपालकों को दूध बेचने के लिए दूर न जाना पड़े और गांव में ही उचित मूल्य मिल सके। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को भी डेयरी कारोबार से जोड़ने पर जोर दिया। गाय खरीदकर पशुपालन शुरू करने की इच्छुक स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को ऋण के माध्यम से सहयोग उपलब्ध कराने की बात कही।
स्वदेशी गोवंश से आधुनिक डेयरी तक हुआ मंथन
अपर मुख्य सचिव पशुपालन एवं दुग्ध विकास मुकेश कुमार मेश्राम ने स्वदेशी नस्ल के गोवंश पालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए सरकारी योजनाओं और उनके लाभों की जानकारी दी। मंडलायुक्त शम्भु कुमार ने कहा कि डेयरी सेक्टर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव बन चुका है और बरेली मंडल में दुग्ध उत्पादन, प्रसंस्करण और डेयरी उद्यमिता के विस्तार की बड़ी संभावनाएं हैं। कॉन्क्लेव में पशुपालकों और नंद बाबा दुग्ध मिशन के लाभार्थियों ने अपनी सफलता की कहानियां भी साझा कीं। विशेषज्ञों ने जैविक खेती, वर्मी कम्पोस्ट, हरा चारा प्रबंधन, आधुनिक दुग्ध उत्पादन और नई तकनीक पर जानकारी दी।
डेयरी कंपनियों ने दिखाईं नई तकनीक और उत्पाद
कार्यक्रम में बरेली डेयरी, आनन्दा डेयरी, वाडीलाल इंडस्ट्रीज, डेयरी क्राफ्ट और शगुन डेयरी समेत विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने डेयरी क्षेत्र में निवेश, आधुनिक तकनीक और नवाचार पर प्रस्तुतियां दीं। पराग, डेयरी इंडिया, प्रीमियर डेयरी, आईवीआरआई, पशुपालन विभाग समेत निजी और सहकारी संस्थाओं ने स्टॉल लगाकर अपने उत्पाद, तकनीक और सेवाएं प्रदर्शित कीं। कार्यक्रम से प्रदेश के दूसरे जिलों के पशुपालकों और उद्यमियों को वेबकास्ट और लाइव यूट्यूब के जरिये भी जोड़ा गया। कॉन्क्लेव का संदेश साफ रहा—स्वदेशी उन्नत गोवंश, बड़े निवेश और आधुनिक प्रोसेसिंग के सहारे डेयरी को खेती के सहायक कारोबार से आगे बढ़ाकर रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का बड़ा इंजन बनाने की तैयारी है।