नई दिल्ली। दुनिया की हाई-टेक इंडस्ट्री के लिए बेहद अहम माने जाने वाले रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर चीन ने एक बार फिर अपनी ताकत का एहसास करा दिया है। जापान को दुर्लभ खनिजों और उनसे बने उत्पादों के निर्यात पर सख्ती बढ़ाकर चीन ने वैश्विक सप्लाई चेन में हलचल मचा दी है। इसका असर इलेक्ट्रिक वाहनों, सेमीकंडक्टर, विंड टर्बाइन, एयरोस्पेस और रक्षा उद्योगों पर पड़ने लगा है। भारत भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
जानकारी के अनुसार मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान जापान को चीन से होने वाला रेयर अर्थ निर्यात करीब 80 प्रतिशत तक घट गया। चीन का कहना है कि ये खनिज और उनसे जुड़े उत्पाद ‘डुअल यूज’ यानी नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं, इसलिए इन पर निर्यात नियंत्रण जारी रहेगा।
दुनिया की सप्लाई चेन में मचा हड़कंप
चीन के फैसले का असर वैश्विक बाजार में साफ दिखाई दे रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों और विंड टर्बाइन में इस्तेमाल होने वाले टर्बियम की कीमत करीब 350 प्रतिशत तक बढ़ गई है। वहीं डिस्प्रोसियम की कीमत में लगभग 450 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है। सेमीकंडक्टर, लेजर और रक्षा उपकरणों में इस्तेमाल होने वाला इट्रियम भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि रेयर अर्थ मिनरल्स आधुनिक तकनीक की रीढ़ हैं। इनके बिना इलेक्ट्रिक कार, ड्रोन, मिसाइल सिस्टम, रडार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सर्वर, मेडिकल उपकरण और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्माण मुश्किल हो जाएगा।
चीन क्यों है इतना ताकतवर?
चीन के पास दुनिया के सबसे बड़े रेयर अर्थ भंडारों में से एक है। अनुमान है कि उसके पास करीब 4.4 करोड़ मीट्रिक टन का रिजर्व मौजूद है। इससे भी बड़ी बात यह है कि दुनिया की लगभग 90 प्रतिशत रेयर अर्थ प्रोसेसिंग क्षमता चीन के नियंत्रण में है। यानी खनिज किसी और देश में निकले, लेकिन उसे उपयोगी उत्पाद में बदलने के लिए दुनिया को चीन की जरूरत पड़ती है।
भारत के सामने क्या चुनौती?
भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रेयर अर्थ भंडार है, लेकिन प्रोसेसिंग और मैग्नेट निर्माण की क्षमता अभी सीमित है। देश में इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा उत्पादन के विस्तार के साथ इन खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में चीन पर निर्भरता एक रणनीतिक जोखिम बन सकती है।
आत्मनिर्भर बनने की तैयारी
केंद्र सरकार ने रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) निर्माण के लिए 7,280 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत खनन से लेकर प्रोसेसिंग और तैयार मैग्नेट बनाने तक की पूरी सप्लाई चेन भारत में विकसित की जाएगी। इसके अलावा ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में ‘रेयर अर्थ कॉरिडोर’ विकसित करने की भी योजना है।
भारत के लिए मौका भी, चुनौती भी
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की सख्ती ने दुनिया को वैकल्पिक सप्लाई चेन बनाने के लिए मजबूर कर दिया है। भारत के पास विशाल भंडार, बढ़ता बाजार और सरकारी समर्थन है। यदि देश समय रहते प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित कर लेता है तो वह न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर सकेगा, बल्कि वैश्विक रेयर अर्थ बाजार में भी बड़ी भूमिका निभा सकता है।