NEW DELHIटेक लीडर्स ने एआई के बढ़ते खतरों पर चिंता जताई

नई दिल्ली/न्यूयॉर्क। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI की तेजी से बढ़ती ताकत को लेकर दुनिया के शीर्ष टेक लीडर्स ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में गंभीर चेतावनी दी है। OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन और Anthropic के CEO डारियो अमोडेई ने कहा कि AI को मानव नियंत्रण में बनाए रखने के लिए वैश्विक स्तर पर ठोस सुरक्षा मानक और आपसी सहयोग जरूरी है। तकनीक का सही प्रबंधन नहीं हुआ तो यह पूरी मानवता के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

अमोडेई बोले- पूरी मानवता के लिए बन सकता है खतरा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बुधवार को AI और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर हुई चर्चा के दौरान Anthropic के CEO डारियो अमोडेई ने कहा कि यदि AI को ठीक तरीके से प्रबंधित नहीं किया गया तो यह पूरी मानवता के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। उन्होंने दुनिया की सरकारों से AI सुरक्षा पर मिलकर काम करने और अत्याधुनिक मॉडल के परीक्षण के लिए साझा मानक तैयार करने की जरूरत बताई।

सैम ऑल्टमैन ने कहा- AI के हाथ में न चला जाए भविष्य

OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने भी AI सिस्टम के इंसानी नियंत्रण से बाहर जाने के खतरे पर आगाह किया। उन्होंने कहा कि दुनिया ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां यह तय होगा कि AI लोगों के हित में काम करने वाली तकनीक बनेगी या इसके बढ़ते प्रभाव से नियंत्रण और शक्ति कुछ हाथों में सिमट जाएगी। ऑल्टमैन ने जोर दिया कि AI से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण फैसले केवल कुछ तकनीकी कंपनियों की प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहने चाहिए। सरकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भी इसमें सक्रिय भूमिका होनी चाहिए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों और AI से जुड़ी गंभीर घटनाओं की तेज रिपोर्टिंग की व्यवस्था बनाने की वकालत की।

किसी एक देश या कंपनी के हाथ में न हो AI की ताकत

दोनों टेक लीडर्स ने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया की सबसे शक्तिशाली AI तकनीक पर किसी एक कंपनी या देश का एकाधिकार नहीं होना चाहिए। खतरनाक क्षमताएं सामने आने पर नए और ज्यादा ताकतवर AI मॉडल जारी करने की रफ्तार धीमी करने की जरूरत भी पड़ सकती है।

AI को लेकर दुनिया में दो अलग-अलग राय

AI के नियंत्रण को लेकर वैश्विक स्तर पर मतभेद भी सामने आए हैं। जहां टेक कंपनियों के कई प्रमुख और विशेषज्ञ अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों की वकालत कर रहे हैं, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वैश्विक स्तर पर AI को नियंत्रित करने की कोशिशों का विरोध कर चुके हैं। उनका तर्क है कि अत्यधिक नियंत्रण से तकनीकी विकास और प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।

युद्ध से साइबर हमलों तक बढ़ी चिंता

AI को लेकर चिंता केवल चैटबॉट या नौकरियों तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञ इसके सैन्य इस्तेमाल, साइबर हमलों, जैविक हथियारों के विकास में दुरुपयोग और अत्यधिक स्वायत्त सिस्टम के मानव नियंत्रण से बाहर जाने जैसे जोखिमों को लेकर भी चेतावनी दे रहे हैं। इसी वजह से संयुक्त राष्ट्र के मंच पर AI अब अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े प्रमुख मुद्दे के रूप में उभर रहा है।

अब दुनिया के सामने बड़ा सवाल- AI को नियंत्रित कौन करेगा?

AI की क्षमताएं जिस तेजी से बढ़ रही हैं, उसी के साथ दुनिया के सामने सबसे बड़ा सवाल इसके नियंत्रण का है। टेक लीडर्स का संदेश साफ है कि AI का भविष्य केवल कंपनियों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। सरकारों, वैज्ञानिकों और तकनीकी कंपनियों को मिलकर ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जिसमें तकनीक आगे बढ़े, लेकिन उसका अंतिम नियंत्रण इंसानों के हाथ में बना रहे।

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