बरेली। मृतक आश्रित कोटे में कनिष्ठ लिपिक की नौकरी पाने के बाद भी अनिवार्य हिंदी टाइपिंग परीक्षा पास नहीं कर पाने पर जिला प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। तीन बार परीक्षा में असफल रहे रेहान खान को कनिष्ठ लिपिक के पद से हटाकर चतुर्थ श्रेणी के पद पर कर दिया गया है। जिलाधिकारी अविनाश सिंह के स्तर से यह कार्रवाई की गई है।
जुलाई 2021 में मिली थी नौकरी
मीरगंज तहसील क्षेत्र के रहने वाले रेहान खान को जुलाई 2021 में मृतक आश्रित कोटे के तहत कनिष्ठ लिपिक के पद पर नियुक्ति मिली थी। पद के लिए निर्धारित शर्तों के अनुसार उन्हें हिंदी टाइपिंग की परीक्षा उत्तीर्ण करनी थी। इसके लिए प्रशासन की ओर से उन्हें अलग-अलग समय पर तीन अवसर दिए गए, लेकिन वह परीक्षा पास नहीं कर सके।
तीन मौके मिले, हर बार हुए असफल
रेहान खान का पहला हिंदी टाइपिंग टेस्ट 25 सितंबर 2023 को हुआ, जिसमें वह असफल रहे। इसके बाद 21 जून 2024 को दूसरी बार परीक्षा देने का मौका मिला, लेकिन इस बार भी सफलता नहीं मिली। प्रशासन ने उन्हें तीसरा अवसर देते हुए 8 सितंबर 2026 को फिर परीक्षा कराई। तीसरी बार भी वह निर्धारित टाइपिंग टेस्ट पास नहीं कर सके। लगातार तीन प्रयासों में असफल रहने के बाद प्रशासन ने उन्हें कनिष्ठ लिपिक के पद से हटाकर चतुर्थ श्रेणी के पद पर कर दिया।
दो कर्मचारियों को मिला आखिरी मौका
हिंदी टाइपिंग परीक्षा में रेहान खान के अलावा अन्य कर्मचारी भी असफल रहे हैं। राजकुमार और लक्ष्मी सक्सेना दो बार परीक्षा पास नहीं कर सके हैं। प्रशासन ने दोनों को एक और मौका दिया है। अंतिम अवसर में भी परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करने पर उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई हो सकती है। वहीं कंचित चौधरी और नेहा जोशी को दूसरी बार टाइपिंग टेस्ट देने का अवसर दिया गया है।
गबन के आरोप में कनिष्ठ लिपिक बर्खास्त
जिला प्रशासन ने एक अन्य मामले में राजस्व वसूली की रकम के गबन के आरोप में कनिष्ठ लिपिक अंशु वर्मा की सेवाएं भी समाप्त कर दी हैं। अंशु वर्मा फरीदपुर में तैनात रहे थे। उन पर राजस्व वसूली से संबंधित धनराशि में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। बताया गया है कि इससे पहले वर्ष 2015-16 में भी उन्हें सेवा से बर्खास्त किया गया था। बाद में ट्रिब्यूनल के आदेश पर मामले की दोबारा सुनवाई और जांच हुई। जांच में आरोप सिद्ध पाए जाने के बाद उनकी सेवाएं फिर समाप्त कर दी गईं। जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई जारी रहेगी।