नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कंपनी की NBFC के तौर पर रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी खारिज कर दी है। इससे टाटा संस के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से बचने की कोशिश को झटका लगा है। मौजूदा नियामकीय व्यवस्था के तहत कंपनी पर लिस्टिंग की बाध्यता बनी रहेगी।
2024 में RBI के पास पहुंची थी टाटा संस
रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा संस ने मार्च 2024 में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन रद्द कराने के लिए RBI के पास आवेदन किया था। कंपनी की कोशिश NBFC के नियामकीय दायरे से बाहर निकलने की थी। अगर आवेदन स्वीकार हो जाता तो उसके निजी कंपनी बने रहने और शेयर बाजार में लिस्टिंग से बचने का रास्ता खुल सकता था। अब RBI ने इस आवेदन को स्वीकार नहीं किया है। इसके बाद टाटा संस का अपर लेयर NBFC के रूप में वर्गीकरण बरकरार रहने की बात सामने आई है।
सितंबर 2022 में अपर लेयर NBFC बनी थी कंपनी
RBI ने सितंबर 2022 में टाटा संस को अपर लेयर NBFC की श्रेणी में शामिल किया था। इस श्रेणी में आने वाली कंपनियों पर कड़े नियामकीय नियम लागू होते हैं और निर्धारित व्यवस्था के तहत शेयर बाजार में लिस्टिंग की बाध्यता भी जुड़ी है। टाटा संस की लिस्टिंग लंबे समय से बाजार में चर्चा का विषय रही है। कंपनी में टाटा ट्रस्ट्स की बड़ी हिस्सेदारी है, जबकि टाटा समूह की कई दिग्गज सूचीबद्ध कंपनियों में टाटा संस की हिस्सेदारी है।
21 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज चुकाया
शेयर बाजार में उतरने की बाध्यता से बचने की कोशिश के तहत टाटा संस ने 2024 में 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चुकाया था। इसके बाद NBFC रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी दी गई। आवेदन लंबे समय तक RBI के पास विचाराधीन रहा, लेकिन अब इसे खारिज किए जाने की खबर सामने आई है।
नए नियमों ने और मुश्किल किया रास्ता
जून 2026 से प्रभावी RBI के संशोधित नियमों ने भी टाटा संस की मुश्किल बढ़ा दी। नए ढांचे के तहत एक लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक की संपत्ति वाली NBFC को अपर लेयर में रखने का प्रावधान है। मार्च 2026 तक टाटा संस की स्वतंत्र संपत्ति दो लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। यानी कंपनी की संपत्ति निर्धारित सीमा से दोगुने से भी ज्यादा है। इसी आधार पर अगस्त में भी उसे अपर लेयर NBFC की श्रेणी में बरकरार रखा गया।
अब Tata Sons IPO पर टिकी बाजार की नजर
RBI के फैसले के बाद अब सबसे बड़ी नजर इस बात पर रहेगी कि टाटा संस अपनी लिस्टिंग की दिशा में कब और किस तरह आगे बढ़ती है। यदि कंपनी IPO के जरिए शेयर बाजार में उतरती है तो यह भारतीय पूंजी बाजार के सबसे चर्चित कॉरपोरेट घटनाक्रमों में से एक हो सकता है। हालांकि, IPO का आकार, कीमत, हिस्सेदारी बिक्री और लॉन्च की तारीख अभी तय होने की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में RBI के फैसले को IPO आने की तत्काल घोषणा के बजाय टाटा संस पर बनी लिस्टिंग बाध्यता के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।