सीएम योगी ने की इन्फ्लुएंजा की स्थिति की समीक्षा, ज्यादा केस वाले जिलों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश
लखनऊ। प्रदेश में इन्फ्लुएंजा-ए (एच1एन1) और सीजनल इन्फ्लुएंजा के मामलों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य विभाग को सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को प्रदेश में संक्रमण की स्थिति और उपचार की तैयारियों की समीक्षा करते हुए सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में एच1एन1 की जांच निःशुल्क कराने को कहा। साथ ही गंभीर मरीजों के लिए अलग आईसीयू वार्ड तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।
जिला अस्पताल से पीएचसी तक मुफ्त होगी जांच
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी), मेडिकल कॉलेजों समेत सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इन्फ्लुएंजा-ए (एच1एन1) की जांच निःशुल्क उपलब्ध कराई जाए। जिन जिलों में ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं, वहां निगरानी और उपचार व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। अस्पतालों में आवश्यक दवाओं, जांच और आइसोलेशन की पर्याप्त व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
गंभीर मरीजों के लिए अलग ICU वार्ड
सीएम योगी ने गंभीर मरीजों के उपचार के लिए अस्पतालों में अलग आईसीयू वार्ड तैयार रखने को कहा। इसके साथ ही एच1एन1 की रोकथाम, जांच और उपचार को लेकर विस्तृत गाइडलाइन जारी करने के निर्देश दिए। टेली-कंसल्टेशन व्यवस्था को भी अधिक प्रभावी बनाने को कहा गया है।
बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर विशेष नजर
मुख्यमंत्री ने बच्चों, गर्भवती महिलाओं, 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। एएनएम, आशा और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की मदद से सघन जांच अभियान चलाकर संभावित मरीजों की पहचान करने को कहा गया है।
फ्लू के मरीजों के लिए अस्पतालों में अलग काउंटर
अस्पतालों में इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षण वाले मरीजों के लिए अलग काउंटर बनाए जाएंगे, ताकि अन्य मरीजों के बीच संक्रमण फैलने की आशंका कम की जा सके। जिन क्षेत्रों में मामलों में बढ़ोतरी दर्ज हो, वहां तत्काल निगरानी बढ़ाकर आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
जागरूकता बढ़ाएं, लोगों में न फैलने दें पैनिक
मुख्यमंत्री ने संक्रमण से बचाव के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोगों को क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इसकी सरल, सही और तथ्यपरक जानकारी दी जाए, ताकि अनावश्यक भय या पैनिक की स्थिति न बने। अस्पतालों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर हाथों की स्वच्छता, खांसते-छींकते समय सावधानी और संक्रमण से बचाव के उपायों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं।