up newsछापेमारी करते टीम।

बरेली। रक्षाबंधन सिर पर है और बाजार में मिलावटी खोया, पनीर और मिठाइयां खपाने वाले सक्रिय हो गए हैं। 275 किलो बदबूदार पनीर और 490 किलो खराब हालत में रखी मिठाई पकड़े जाने के बाद भी एफएसडीए की कार्रवाई दुकानों से नमूने भरने तक सिमटी नजर आ रही है। सवाल यह है कि खोया मंडी और बड़े सप्लायरों पर विभाग का चाबुक आखिर कब चलेगा।

सहायक आयुक्त (खाद्य)-II राहुल सिंह के निर्देशन में चार टीमों ने सोमवार को अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई की। नदोसी मेन रोड स्थित वीरपाल/अंकुर स्वीट की निर्माण इकाई में टीम पहुंची तो वहां अस्वच्छ परिस्थितियों में सूजी और स्किम्ड मिल्क पाउडर आदि से लौज, बर्फी, सोहनपापड़ी और रसगुल्ले तैयार कर रखे मिले। विभाग ने यहां से नमूने लेने के बाद 140 किलो दूध की लौज और 350 किलो बर्फी यानी 490 किलो मिठाई नष्ट करा दी। एक ही ठिकाने पर इतनी बड़ी मात्रा में माल मिलने के बाद सवाल यह है कि मिठाई तैयार करने के लिए इस्तेमाल हो रहा कच्चा माल आखिर कहां से आ रहा था, सप्लाई चेन की तह तक विभाग पहुंचा या नहीं, इसकी कोई जानकारी जारी नहीं की गई।

दुकानों पर टीमें दौड़ीं, खोया मंडी का नंबर कब

रक्षाबंधन पर सबसे ज्यादा मांग खोया और उससे तैयार मिठाइयों की होती है। इसके बावजूद विभाग की कार्रवाई मिठाई दुकानों तक सीमित है। सूफीटोला स्थित चुन्ने एंड संस स्वीट्स, मुरावपुरा में दिनेश कुमार पेठा, पीरबहोड़ा में माई च्वाइस स्वीट्स और छोटे लाल लस्सी भंडार से पेठा, बर्फी, खोया और लड्डू के नमूने लिए गए। लेकिन बड़ा सवाल खोया मंडी और थोक सप्लायरों को लेकर है। त्योहार से पहले भारी मात्रा में खोया बाजार में पहुंच रहा है। ऐसे में फुटकर दुकानों के पीछे दौड़ने के साथ यह देखना भी जरूरी है कि खोया कहां से आ रहा है, कौन सप्लाई कर रहा है और उसकी गुणवत्ता क्या है। विभाग के प्रेस नोट में खोया मंडी पर किसी बड़ी कार्रवाई का उल्लेख नहीं है।

आधी रात बदबूदार पनीर की खेप ने खोल दी निगरानी की पोल

मिलावट और खराब खाद्य सामग्री का खेल कितना बड़ा हो सकता है, इसका अंदाजा रविवार रात हुई कार्रवाई से लगाया जा सकता है। बदायूं से बरेली आ रही UP-24 AZ-2122 नंबर की वैन रोकी गई तो उसमें करीब 275 किलो पनीर मिला। खाद्य विभाग के मुताबिक पनीर बेहद खराब था और उससे बदबू आ रही थी। टीम ने नमूना लेकर करीब 274 किलो पनीर नष्ट करा दिया। इसकी कीमत 65,760 रुपये आंकी गई। कार्रवाई तो हो गई, मगर इससे कहीं बड़ा सवाल पीछे छूट गया, इतनी बड़ी खेप बरेली में किसके यहां उतरनी थी, किस कारोबारी ने इसे मंगाया था और खराब पनीर आखिर किस मिठाई या खाद्य पदार्थ में खपाया जाना था।

पनीर पकड़ा, मगर खरीदार कौन, यहीं आकर जांच क्यों थमी

वैन में पनीर लेकर आ रहे अरसान निवासी कटकुइयां, पुराना शहर को टीम ने पुलिस के साथ रोका था। अगर पनीर जनस्वास्थ्य के लिए इतना खराब था कि उसे तत्काल नष्ट कराना पड़ा तो उसके पूरे नेटवर्क की जांच भी उतनी ही जरूरी है। सिर्फ माल पकड़कर नष्ट कर देना पर्याप्त नहीं है। सप्लायर से लेकर खरीदार तक की कड़ी सामने आए तभी त्योहार पर खराब खाद्य पदार्थों के कारोबार पर वास्तविक चोट मानी जाएगी। रक्षाबंधन से ठीक पहले बाजार में मिठाइयों की बिक्री कई गुना बढ़ जाती है। मांग बढ़ते ही खोया, पनीर और दूध से बने उत्पादों की सप्लाई भी तेज हो जाती है। यही वह वक्त है जब मिलावट और खराब माल खपाने का खतरा सबसे अधिक रहता है। ऐसे में विभाग की कार्रवाई केवल कुछ दुकानों से सैंपल भरने तक सीमित रही तो इसका फायदा मिलावट के बड़े खिलाड़ियों को मिल सकता है।

अभियान की असली परीक्षा खोया मंडी और बड़े सप्लायर

सहायक आयुक्त (खाद्य)-II राहुल सिंह का कहना है कि रक्षाबंधन को देखते हुए मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। लेकिन विभाग के दावे की असली परीक्षा अब खोया मंडी, बड़े पनीर-खोया सप्लायर, निर्माण इकाइयों और बाहर से आने वाली खेपों पर कार्रवाई से होगी। 765 किलो खराब या अस्वच्छ परिस्थितियों में रखा खाद्य पदार्थ दो कार्रवाइयों में ही सामने आ चुका है। ऐसे में सवाल सिर्फ इतना है जब त्योहार के बाजार में इतनी बड़ी मात्रा में संदिग्ध माल पहुंच रहा है तो विभाग मिलावट की जड़ पर कब वार करेगा। दुकानों से नमूने भरने की रस्म आगे भी चलती रही और थोक नेटवर्क बचा रहा तो रक्षाबंधन पर चल रहे अभियान को खानापूर्ति के सवालों से बचाना मुश्किल होगा।

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