लगातार सड़क हादसों के बीच मनोहर भूषण और गुलाब राय मोंटेसरी स्कूल का बड़ा फैसला, हर छात्र के वाहन का होगा सत्यापन
बरेली। शहर में नाबालिग स्कूली बच्चों के दोपहिया वाहन चलाने और सड़क हादसों के मामले लगातार चिंता बढ़ा रहे हैं। अभिभावकों की लापरवाही और बच्चों के हाथों में मोटरसाइकिल-स्कूटी पहुंचने से स्कूल आने-जाने के दौरान दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। ऐसे हालात में अब स्कूल प्रबंधन ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है।
18 साल से कम उम्र के बच्चे पहुंच रहे मोटरसाइकिल-स्कूटी से स्कूल
शहर के मनोहर भूषण इंटर कॉलेज और गुलाब राय मोंटेसरी स्कूल में ऐसे विद्यार्थी भी सामने आए हैं, जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम है और वे घर से स्वयं मोटरसाइकिल अथवा स्कूटी चलाकर विद्यालय पहुंचते हैं। यह स्थिति न केवल यातायात नियमों के उल्लंघन का मामला है, बल्कि बच्चों और सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकती है।
स्कूल बोले—अभिभावकों से कई बार कर चुके हैं अपील
विद्यालय स्तर पर इस संबंध में बातचीत करने पर शिक्षकों का कहना है कि बच्चों को दोपहिया वाहन से स्कूल न भेजने के लिए अभिभावकों को कई बार समझाया जा चुका है। शिक्षकों ने बताया कि बच्चों की उम्र कम होने के कारण उन्हें वाहन चलाने से रोकने की कोशिश की जाती रही है, लेकिन कई मामलों में अभिभावक भी इस बात को गंभीरता से नहीं ले रहे।
“हम बच्चों को रोकते हैं, लेकिन अभिभावक हमारी बात नहीं मानते”
विद्यालय से जुड़े शिक्षकों का कहना है कि स्कूल स्तर पर बच्चों को समझाने के साथ-साथ उनके अभिभावकों को भी लगातार बताया जाता है कि नाबालिग बच्चे दोपहिया वाहन लेकर सड़क पर न निकलें। इसके बावजूद कई अभिभावक बच्चों को वाहन देकर भेज रहे हैं। अब स्कूल प्रबंधन इस व्यवस्था को केवल समझाने तक सीमित रखने के बजाय सत्यापन की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है।
अब हर विद्यार्थी के वाहन की होगी जांच और सत्यापन
विद्यालय प्रबंधन द्वारा अब विद्यार्थियों के वाहनों का सत्यापन कराया जाएगा। यह देखा जाएगा कि वाहन किसके नाम पर है, विद्यार्थी की उम्र कितनी है और वह वाहन लेकर विद्यालय क्यों आ रहा है। इससे स्कूल प्रशासन को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कितने नाबालिग विद्यार्थी स्वयं दोपहिया वाहन चलाकर स्कूल पहुंच रहे हैं।
स्कूल परिसर में दोपहिया वाहन लाने पर लग सकती है रोक
स्कूल प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि नाबालिग विद्यार्थियों को दोपहिया वाहन से विद्यालय आने से रोकने के लिए सख्त व्यवस्था लागू की जाएगी। ऐसे विद्यार्थियों के विद्यालय परिसर में मोटरसाइकिल या स्कूटी लाने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। उद्देश्य यह है कि स्कूल के गेट से ही ऐसी व्यवस्था लागू हो, जिससे नाबालिग विद्यार्थी स्वयं वाहन चलाकर विद्यालय न पहुंचें।
हादसे ने बढ़ाई चिंता—एक गलती पड़ सकती है भारी
सड़क पर वाहन चलाते समय थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। नाबालिग बच्चों के पास वाहन चलाने का पर्याप्त अनुभव नहीं होता और यातायात नियमों की पूरी जानकारी भी अक्सर नहीं होती। तेज रफ्तार, हेलमेट का इस्तेमाल न करना, ट्रैफिक सिग्नल की अनदेखी और मोबाइल फोन का इस्तेमाल जैसी लापरवाहियां दुर्घटना का खतरा और बढ़ा देती हैं।
सवाल सिर्फ नियम का नहीं, बच्चों की जिंदगी का है
नाबालिग बच्चों को मोटरसाइकिल या स्कूटी देना केवल यातायात नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा को जोखिम में डालने वाला कदम है। सड़क पर किसी दुर्घटना की स्थिति में बच्चे के साथ-साथ सामने वाले वाहन चालक की जान भी खतरे में पड़ सकती है। यही वजह है कि स्कूल प्रशासन अब अभिभावकों की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है।
स्कूल की सख्ती के बाद अभिभावकों की जिम्मेदारी भी तय
विद्यालय प्रबंधन की नई व्यवस्था के बाद अभिभावकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। यदि बच्चे की उम्र 18 वर्ष से कम है तो उसे स्वयं मोटरसाइकिल या स्कूटी चलाकर स्कूल भेजने के बजाय अभिभावकों को उसे विद्यालय तक पहुंचाने अथवा सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था करने की जरूरत होगी।
नियम तोड़ने वालों पर प्रशासन की नजर भी जरूरी
स्कूलों द्वारा अपने स्तर पर कदम उठाया जाना स्वागत योग्य है, लेकिन शहर में नाबालिग वाहन चालकों की समस्या केवल विद्यालय के गेट तक सीमित नहीं है। यातायात पुलिस और परिवहन विभाग को भी स्कूलों के आसपास विशेष अभियान चलाकर नाबालिग वाहन चालकों की जांच करनी होगी। कार्रवाई के साथ अभिभावकों को जागरूक करना भी जरूरी होगा, ताकि बच्चों को वाहन सौंपने की प्रवृत्ति पर रोक लग सके।
स्कूलों का संदेश—पहले बच्चे की सुरक्षा, फिर सुविधा
मनोहर भूषण इंटर कॉलेज और गुलाब राय मोंटेसरी स्कूल की पहल से दूसरे विद्यालयों के लिए भी एक संदेश गया है कि बच्चों को दोपहिया वाहन देकर स्कूल भेजना सुविधा भले ही हो, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से गंभीर जोखिम है। अब वाहनों के सत्यापन और स्कूल परिसर में दोपहिया वाहन लाने पर रोक की व्यवस्था से नाबालिग वाहन चालकों पर अंकुश लगाने की कोशिश की जाएगी।
सबसे बड़ा सवाल: आखिर अभिभावक कब समझेंगे?
स्कूल प्रबंधन बच्चों को समझाने और रोकने की कोशिश कर रहा है, लेकिन जब तक अभिभावक खुद जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक समस्या पूरी तरह खत्म होना मुश्किल है। बच्चे की कुछ मिनट की सुविधा के लिए उसे सड़क पर उतारना कहीं ऐसा फैसला न बन जाए, जिसका नुकसान पूरी जिंदगी भुगतना पड़े। सड़क सुरक्षा की शुरुआत स्कूल के गेट से नहीं, बल्कि घर से होनी चाहिए।