बरेली। सरकारी स्कूल की पुरानी तस्वीर को पीछे छोड़ बरेली छावनी क्षेत्र का आरएन टैगोर इंटर कॉलेज आधुनिक शिक्षा की नई इबारत लिख रहा है। यहां बच्चे अब केवल किताबों और ब्लैकबोर्ड तक सीमित नहीं हैं। छठी कक्षा से ही उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान, रोबोटिक्स और ड्रोन टेक्नोलॉजी की दुनिया से रूबरू कराया जा रहा है। स्कूल में स्थापित खगोल विज्ञान केंद्र और अत्याधुनिक ड्रोन व रोबोटिक्स लैब इसे शहर के बड़े कॉन्वेंट स्कूलों को टक्कर देने वाले संस्थान के रूप में पहचान दिला रही हैं।
बरेली छावनी बोर्ड की पहल पर विद्यालय की पारंपरिक शिक्षण व्यवस्था को प्रयोग और नवाचार आधारित शिक्षा से जोड़ा गया है। इसका मकसद बच्चों में कम उम्र से ही वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना है। खगोल विज्ञान केंद्र में छात्र ग्रहों, तारों, अंतरिक्ष मिशनों और विभिन्न खगोलीय घटनाओं के बारे में सिर्फ पढ़ते नहीं, बल्कि प्रयोग और प्रत्यक्ष अवलोकन के माध्यम से उन्हें समझते भी हैं।
नन्हे हाथ असेंबल कर रहे ड्रोन, बना रहे रोबोट
विद्यालय की ड्रोन और रोबोटिक्स लैब बच्चों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण बन गई है। विशेष प्रशिक्षकों की निगरानी में विद्यार्थी तकनीकी मॉडल तैयार करने के साथ ड्रोन के शुरुआती हिस्सों को खुद असेंबल करना सीख रहे हैं। रोबोटिक्स लैब में भी बच्चों ने अपनी रचनात्मकता का परिचय देते हुए कई उपयोगी मॉडल तैयार किए हैं। इनमें पहाड़ी क्षेत्रों में हादसों का खतरा कम करने के उद्देश्य से तैयार सेंसरयुक्त विशेष लाइट का मॉडल भी शामिल है।
विद्यालय प्रशासन का मानना है कि बच्चों को सही संसाधन और तकनीकी मार्गदर्शन मिले तो सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी भी विज्ञान और भविष्य की तकनीकों में शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं। इसी सोच के साथ बच्चों को पाठ्यपुस्तकों से बाहर निकालकर व्यावहारिक और अनुसंधान आधारित शिक्षा से जोड़ा जा रहा है।
कम उम्र में विज्ञान से जुड़ेंगे तो बदलेगी सोच
प्रधानाचार्य वंदना मिश्रा के मुताबिक व्यावहारिक और अनुसंधान-उन्मुख शिक्षा बच्चों के विश्लेषणात्मक कौशल को मजबूत करती है। कम उम्र से प्रयोग आधारित विज्ञान से जुड़ने पर विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ता है और किसी समस्या को समझने तथा उसका समाधान खोजने का नजरिया भी विकसित होता है।
अब जल संरक्षण की बारी, बनेगा रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
कैंट बोर्ड की सीईओ डॉ. तनु जैन ने बताया कि योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभा को बेहतर मंच और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराना है। विभिन्न आधुनिक लैब के जरिए विद्यालय को विकसित किया गया है। अब अगले चरण में स्कूल परिसर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग समेत अन्य विकास कार्यों की योजना पर काम किया जा रहा है। इससे तकनीकी शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को पर्यावरण और जल संरक्षण से भी जोड़ा जाएगा।