बरेली। शहर की सफाई व्यवस्था बुधवार को पूरी तरह पटरी से उतर गई। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन से जुड़े संविदा कर्मचारियों ने छह साथियों पर दर्ज मुकदमे के विरोध और वेतन विसंगति को लेकर सामूहिक कार्य बहिष्कार कर दिया। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से शहर के कई इलाकों में कूड़ा उठान ठप हो गया, जबकि विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर कर्मचारियों ने सड़कों पर कूड़ा फेंककर नाराजगी भी जताई। इससे राहगीरों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
शहर में लगातार दूसरे दिन कूड़ा न उठने से कॉलोनियों, मोहल्लों और बाजारों में गंदगी के ढेर लगने लगे हैं। गर्मी और उमस के बीच सड़कों पर जमा कूड़ा लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। कई क्षेत्रों में दुर्गंध फैलने लगी है, जिससे नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि सफाई व्यवस्था ठप होने से स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी पैदा हो सकते हैं।
13 हजार की जगह 7500 रुपये देने का आरोप
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें उनके हक का पूरा वेतन नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि सरकारी मानकों के अनुसार डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन में लगे संविदा कर्मचारियों का वेतन 13 हजार रुपये निर्धारित है, लेकिन ठेकेदार की ओर से मात्र 7,500 रुपये का भुगतान किया जा रहा है। कर्मचारियों ने इसे आर्थिक शोषण बताते हुए कहा कि वर्षों से वे कम वेतन पर काम करने को मजबूर हैं।
मुकदमा वापस लेने की मांग पर अड़े कर्मचारी
संविदाकर्मियों का कहना है कि उनके छह साथियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे ने कर्मचारियों में रोष पैदा कर दिया है। उनका आरोप है कि कर्मचारियों की समस्याओं को सुनने के बजाय उन पर कानूनी कार्रवाई की गई। कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक मुकदमे वापस नहीं लिए जाते और वेतन संबंधी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे।
प्रशासन के सामने सफाई व्यवस्था बहाल करने की चुनौती
कूड़ा उठान बंद होने से नगर की सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। प्रशासन और संबंधित विभाग अब इस गतिरोध को समाप्त कराने के प्रयास में जुट गए हैं। अधिकारियों के सामने एक ओर शहर को कूड़े के ढेर से बचाने की चुनौती है, तो दूसरी ओर नाराज कर्मचारियों की मांगों का समाधान निकालना भी जरूरी हो गया है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो शहर में गंदगी की समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।