बरेली। 108वें उर्स-ए-रज़वी के समापन के बाद शनिवार को जायरीन की वापसी शुरू हुई तो बरेली में रेलवे, रोडवेज और ट्रैफिक व्यवस्था की तैयारियों की असल परीक्षा भी शुरू हो गई। लाखों अकीदतमंदों के एक साथ घरों की ओर रुख करते ही रेलवे जंक्शन से लेकर बस अड्डों और प्रमुख सड़कों तक भारी भीड़ उमड़ पड़ी। रेलवे ने अतिरिक्त टिकट काउंटर, विशेष ट्रेन, अतिरिक्त कोच, सहायता बूथ और आरपीएफ की तैनाती के लंबे-चौड़े दावे किए, लेकिन जंक्शन पर सामने आई तस्वीर इन दावों से बिल्कुल उलट दिखाई दी। ट्रेनों के दरवाजों तक पहुंचना मुश्किल हुआ तो जायरीन खिड़कियों से डिब्बों में घुसते नजर आए।
कुल शरीफ के बाद वापसी का सिलसिला तेज होते ही बरेली जंक्शन पर यात्रियों का दबाव कई गुना बढ़ गया। प्लेटफॉर्म, फुटओवर ब्रिज और स्टेशन परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई। ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचते ही सीट और डिब्बे में जगह पाने के लिए अफरातफरी जैसी स्थिति बनती दिखाई दी। हालात ऐसे रहे कि कई डिब्बों के दरवाजों पर यात्रियों की भीड़ जमा हो गई। अंदर जाने का रास्ता नहीं मिला तो कुछ जायरीन खिड़कियों के रास्ते डिब्बों में प्रवेश करते दिखाई दिए। इस दौरान जरा सी चूक बड़े हादसे की वजह बन सकती थी।
चार अतिरिक्त काउंटर, छह ATVM, फिर भी भीड़ के आगे इंतजाम बौने
उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल ने उर्स को देखते हुए 6 से 8 अगस्त तक विशेष व्यवस्थाएं करने का दावा किया था। रेलवे के मुताबिक बरेली स्टेशन पर चार अतिरिक्त टिकट काउंटर, छह ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग मशीन (ATVM) और तीन जनसाधारण टिकट बुकिंग सेवा (JTBS) की व्यवस्था की गई। मुख्य प्रवेश द्वार पर सहायता बूथ और सर्कुलेटिंग एरिया में विशेष सहायता कैंप भी लगाया गया। आरपीएफ और वाणिज्य विभाग की टीमों को भीड़ प्रबंधन में लगाया गया। मगर उर्स समाप्त होते ही यात्रियों का दबाव बढ़ा तो स्टेशन पर दिखाई दी तस्वीर रेलवे की तैयारियों पर सवाल खड़े करती नजर आई।
स्पेशल ट्रेन और अतिरिक्त कोच भी पड़े कम
रेलवे ने जायरीन की संख्या को देखते हुए विशेष ट्रेन चलाने, कुछ ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगाने और चुनिंदा गाड़ियों को अतिरिक्त ठहराव देने की व्यवस्था की थी। इसके बावजूद वापसी के वक्त ट्रेनों में जगह पाने के लिए मारामारी दिखाई दी। सबसे चौंकाने वाली तस्वीर तब सामने आई जब यात्री ट्रेन की खिड़कियों से डिब्बों में घुसते नजर आए। सवाल यह है कि जब लाखों जायरीन के आने और उर्स के बाद लगभग एक साथ वापसी करने का अनुमान पहले से था, तो उस अनुपात में ट्रेनों और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
बस अड्डों पर भी बेहाल मुसाफिर, बस आई तो टूट पड़ी भीड़
रेलवे स्टेशन ही नहीं, रोडवेज की व्यवस्था भी यात्रियों के दबाव में चरमराती दिखाई दी। रूट डायवर्जन और बदली हुई यातायात व्यवस्था के बीच सैटेलाइट बस स्टैंड पर बड़ी संख्या में जायरीन पहुंच गए। बस आते ही उसमें जगह पाने के लिए यात्रियों की भीड़ उमड़ती रही। दिल्ली, लखनऊ और पीलीभीत समेत प्रमुख रूटों के यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगह यात्री बसों की सीढ़ियों तक पर सफर करते दिखाई दिए। ऐसे में अतिरिक्त बसों और सुरक्षित यात्रा के इंतजामों पर भी सवाल उठे।
इधर रेलवे ने थपथपाई पीठ, उधर खिड़कियों से घुसते रहे मुसाफिर
सबसे बड़ा विरोधाभास रेलवे के आधिकारिक दावे और स्टेशन पर दिखाई दी स्थिति के बीच रहा। उत्तर रेलवे, मुरादाबाद मंडल ने जारी सूचना में कहा कि जायरीन की सुविधा, सुरक्षा एवं सुगम रेल यात्रा को प्राथमिकता देते हुए विशेष इंतजाम किए गए हैं और रेलवे की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। रेलवे ने पेयजल, खानपान, सहायता कैंप, अतिरिक्त टिकट काउंटर, आरपीएफ की सक्रियता, विशेष ट्रेन और अतिरिक्त कोच तक गिनाए। लेकिन उसी दौरान ट्रेनों की खिड़कियों से अंदर जाते यात्रियों और प्लेटफॉर्म पर उमड़ी भारी भीड़ की तस्वीरें इन इंतजामों की पर्याप्तता पर गंभीर सवाल खड़े करती रहीं।
सीनियर डीसीएम का बयान
रेलवे के सीनियर डीसीएम महेश यादव की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी में दावा किया गया कि उत्तर रेलवे, मुरादाबाद मंडल उर्स के दौरान जायरीन की सुविधा और सुरक्षा के लिए की गई व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी कर रहा है। इस तरह की कोई भी परेशानी नहीं हुई।