वैज्ञानिकएआई से बनाई गई फोटो।

बरेलीसाइबर जालसाजों ने आईवीआरआई के रिटायर्ड वरिष्ठ वैज्ञानिक के बैंक खाते से पिछले कई महीनों में धीरे-धीरे करीब 2.10 लाख रुपये निकाल लिए। हैरत की बात यह रही कि ठग इतनी सफाई से वार करते रहे कि पीड़ित को इसकी भनक तक नहीं लगी। जब बैंक खाते की जानकारी खंगाली गई तो लाखों रुपये गायब मिले। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।

प्रेमनगर थाना क्षेत्र के राजेंद्र नगर निवासी डॉ. ब्रिजेश बिहारीलाल माथुर ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि वह आईवीआरआई मुख्य वैज्ञानिक (विभागाध्यक्ष) पद से सेवानिवृत्त हैं। उनका एक्सिस बैंक में खाता है। आरोप है कि पिछले कुछ महीनों के दौरान उनके खाते से अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए करीब 2.10 लाख रुपये निकाल लिए गए। उन्हें लंबे समय तक इन निकासी की जानकारी ही नहीं हो सकी।

पासबुक और खाते का विवरण देखा तो खुली ठगी की परतें

वैज्ञानिक डॉ. माथुर ने जब बैंक खाते का विवरण और लेन-देन की जानकारी देखी तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। खाते से लगातार रकम निकलने का खुलासा हुआ। इसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस का दरवाजा खटखटाया और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा ठगी गई रकम वापस दिलाने की मांग की।

पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, साइबर ठगों की तलाश शुरू

पीड़ित वैज्ञानिक की तहरीर के आधार पर प्रेमनगर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस बैंक ट्रांजैक्शन, तकनीकी साक्ष्यों और साइबर ट्रेल के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि रकम किन माध्यमों से निकाली गई और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं। साथ ही ठगी गई रकम की रिकवरी के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

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