पुलिस की गिरफ्त में आरोपी (पीली टी-शर्ट में)

बरेली। शेयर बाजार में मोटे मुनाफे का झांसा देकर करीब 49.43 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड को साइबर क्राइम थाना बरेली ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से लैपटॉप, मोबाइल, डेबिट कार्ड, चेकबुक समेत साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और उपकरण बरामद किए हैं। मामले में पीड़ित की करीब 31 लाख रुपये की रकम भी लीन होल्ड कराकर सुरक्षित कराई गई है।

एसपी क्राइम मनीष कुमार सोनकर ने खुलासा करते हुए बताया कि आशीष रॉयल पार्क, डेंटल कॉलेज निवासी आलोक दुबे ने 8 जून 2026 को शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें शेयर मार्केट में एल्गो ट्रेडिंग के माध्यम से निवेश कर भारी लाभ कमाने का लालच दिया गया। आरोपी ने व्हाट्सएप पर लिंक भेजकर एससी ब्रोकिंग नामक ऐप डाउनलोड कराया और केवाईसी पूरी कराकर निवेश खाता खुलवाया। इसके बाद 16 जनवरी से 30 अप्रैल 2026 के बीच उनसे 20 ट्रांजेक्शन में कुल 49.43 लाख रुपये जमा करा लिए गए।

कमीशन और जीएसटी के नाम पर भी वसूली

पीड़ित से निवेश राशि निकालने के लिए पहले 15 प्रतिशत कमीशन और फिर 18 प्रतिशत जीएसटी जमा कराने को कहा गया। बार-बार भुगतान के बावजूद आरोपी ऑडिट, ऐप अपडेट और तकनीकी दिक्कतों का बहाना बनाकर रकम लौटाने से बचता रहा। संदेह होने पर पीड़ित ने एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और साइबर क्राइम थाना बरेली में सूचना दी। एसएसपी अनुराग आर्य और एसपी क्राइम के निर्देश पर थाना साइबर क्राइम में मुकदमा दर्ज कर तत्काल कार्रवाई शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर गिरोह के मुख्य आरोपी सचिन कुमार पुत्र रामबीर सिंह, निवासी विश्वनाथ एन्क्लेव, सहस्वधारा रोड, देहरादून की पहचान की जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

फर्जी कंपनियां और बैंक खाते बनाकर चलाता था खेल

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने एसएमसी एंटरप्राइजेज के नाम से कंपनी बनाकर विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाए थे। वह अलग-अलग पते दर्शाकर खातों का संचालन करता था और निवेशकों से फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर रकम जमा कराता था। आरोपी ने SMC Broking.com और Start Investment.com नाम से फर्जी ट्रेडिंग ऐप और वेबलिंक तैयार कर रखे थे। पूछताछ में खुलासा हुआ कि ठगी की रकम को पहले ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और पेमेंट गेटवे के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था। इसके बाद यूएसडीटी के जरिए ट्रस्ट वॉलेट में ट्रांसफर कर हवाला नेटवर्क के माध्यम से नकदी हासिल की जाती थी। गिरोह ठगी के बाद निवेशकों की आईडी डी-एक्टिवेट कर देता था ताकि वे अपनी रकम वापस न निकाल सकें।

देहरादून से गिरफ्तारी, भारी बरामदगी

साइबर क्राइम थाना टीम ने 12 जून को रेलवे स्टेशन रोड, देहरादून क्षेत्र से आरोपी को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से आठ डेबिट कार्ड, लैपटॉप, मोबाइल फोन, चेकबुक, पासबुक, आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक दस्तावेज, मोहर, राउटर और अन्य अभिलेख बरामद किए गए हैं। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी के खिलाफ तेलंगाना के मल्काजगिरी और कर्नाटक के बेंगलुरु में भी साइबर ठगी से संबंधित शिकायतें दर्ज हैं। बरेली पुलिस अब उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है। आरोपी को न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लेने की कार्रवाई की जा रही है।

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