Avnish Pandey
बरेली। भीषण गर्मी, लगातार बिजली कटौती और जनप्रतिनिधियों के फोन तक न उठाने की शिकायतों के बीच रविवार को बरेली में ऊर्जा विभाग का पारा चढ़ गया। प्रदेश के ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत राज्यमंत्री कैलाश सिंह राजपूत के जिले में आगमन से ठीक पहले बिजली निगम ने लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई कर सख्त संदेश दिया है। दो जूनियर इंजीनियरों (जेई) को परिनिंदा प्रविष्टि और दो अन्य को अंतिम चेतावनी जारी किए जाने से महकमे में खलबली मच गई है। ऊर्जा मंत्री रविवार शाम चार बजे कलेक्ट्रेट सभागार में विभागीय समीक्षा बैठक करेंगे। बैठक में सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी मौजूद रहेंगे। ऐसे में बिजली व्यवस्था, अघोषित कटौती और उपभोक्ताओं की शिकायतें बैठक का सबसे बड़ा मुद्दा बनने जा रही हैं।
जनप्रतिनिधियों के फोन तक नहीं उठाते थे अफसर
दरअसल 23 मई को वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में जनप्रतिनिधियों ने बिजली निगम की कार्यशैली पर जमकर नाराजगी जताई थी। सबसे ज्यादा शिकायत इस बात को लेकर आई थी कि कई जेई और अधिकारी न तो उपभोक्ताओं की सुनते हैं और न ही जनप्रतिनिधियों के फोन उठाते हैं। इससे बिजली संकट के दौरान लोगों की समस्याएं और बढ़ रही थीं। शिकायतों के बाद मुख्य अभियंता ज्ञान प्रकाश ने कड़ा रुख अपनाया। अधिक शिकायत वाले अधिकारियों का पहले तबादला किया गया और अब अधीक्षण अभियंता नगरीय धर्मेंद्र कुमार सिंह ने तत्कालीन अवर अभियंता मंजीत सिंह और चंद्रमा सिंह को परिनिंदा प्रविष्टि दी है। वहीं 11 केवी एवं एलटी वर्टिकल के तत्कालीन अवर अभियंता साबिर खान और कृष्णकांत को अंतिम चेतावनी जारी की गई है।
मंत्री की समीक्षा से पहले बढ़ी अफसरों की बेचैनी
ऊर्जा मंत्री कैलाश सिंह राजपूत रविवार दोपहर बरेली पहुंचेंगे और सर्किट हाउस में विश्राम के बाद कलेक्ट्रेट सभागार में विभागीय समीक्षा बैठक करेंगे। माना जा रहा है कि जिले में बिजली कटौती, लो-वोल्टेज, ट्रिपिंग और शिकायत निस्तारण की स्थिति पर अधिकारियों से जवाब-तलब किया जा सकता है। मंत्री के दौरे से पहले हुई कार्रवाई को विभागीय स्तर पर बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। लगातार बिजली कटौती से परेशान उपभोक्ताओं की निगाहें अब मंत्री की समीक्षा बैठक पर टिक गई हैं। लोगों को उम्मीद है कि बैठक के बाद बिजली व्यवस्था में सुधार और लापरवाह अधिकारियों पर और सख्त कार्रवाई देखने को मिल सकती है।