लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव 2026 से पहले योगी सरकार ने ओबीसी आरक्षण को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण तय करने के लिए पांच सदस्यीय “राज्य ग्रामीण स्थानीय निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग” का गठन कर दिया है। देर रात जारी अधिसूचना के बाद प्रदेश की राजनीति और पंचायत चुनावी समीकरणों में हलचल तेज हो गई है।
रिटायर्ड जज राम अवतार सिंह को मिली आयोग की कमान
सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस राम अवतार सिंह को आयोग का अध्यक्ष बनाया है। आयोग में रिटायर्ड अपर जिला जज बृजेश कुमार, संतोष कुमार विश्वकर्मा, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया और एस.पी. सिंह को सदस्य नियुक्त किया गया है। आयोग छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा।
गांव-गांव के आंकड़ों से तय होगा आरक्षण
यह आयोग पंचायतों में ओबीसी आबादी, प्रतिनिधित्व और आरक्षण से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन करेगा। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों के मुताबिक स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए “ट्रिपल टेस्ट” प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत सरकार ने यह आयोग बनाया है। सरकार का दावा है कि आयोग की रिपोर्ट आने के बाद पंचायत चुनावों में आरक्षण का नया ढांचा तैयार किया जाएगा, ताकि भविष्य में चुनाव कानूनी विवादों में न फंसें।
पंचायत चुनाव की सियासत में बढ़ी हलचल
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंचायत चुनाव से पहले ओबीसी आरक्षण का मुद्दा बेहद अहम माना जा रहा है। प्रदेश की बड़ी आबादी ओबीसी वर्ग से जुड़ी है और पंचायत स्तर पर इसका सीधा असर चुनावी समीकरणों पर पड़ता है। ऐसे में आयोग की रिपोर्ट आने तक सभी दलों की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी रहेगी।
क्या है ट्रिपल टेस्ट?
सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए तीन शर्तें तय की हैं—
- पिछड़े वर्ग की वास्तविक स्थिति का अध्ययन
- आयोग के जरिए डाटा आधारित रिपोर्ट
- कुल आरक्षण सीमा का संतुलन
इन्हीं शर्तों को पूरा करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने यह नया आयोग गठित किया है।