बरेली। बरेली में एक बार फिर प्रेम की खातिर मजहबी और सामाजिक बेड़ियों को तोड़ने का बड़ा मामला सामने आया है। यहां जौनपुर की रहने वाली शाहजहां बानो ने प्रतापगढ़ के पवन कुमार यादव से अपने प्रेम को मुकम्मल करने के लिए सनातन धर्म अपना लिया है। अगस्त्य मुनि आश्रम में दोनों का प्रेम विवाह हिंदू रीति-रिवाज और पूर्ण वैदिक पद्धतियों के अनुसार संपन्न हुआ।
- शाहजहां बानो ने आश्रम के पंडितों की उपस्थिति में गोमूत्र और पावन गंगाजल पीकर शुद्धिकरण किया, जिसके बाद वह सनातन धर्म का हिस्सा बनीं। इस प्रेम विवाह और धर्म परिवर्तन की चर्चा अब पूरे परिक्षेत्र समेत सोशल मीडिया पर तेजी से सुर्खियां बटोर रही है।
लंबे समय से चल रहा था प्रेम प्रसंग
शाहजहां बानो पुत्री समीउल्ला, निवासी ग्राम नाहरमऊ, भीलमपुर जिला जौनपुर और पवन कुमार यादव पुत्र भारत राम यादव, निवासी फतनपुर रोड, अवधानपुर, भेजेमऊ जिला प्रतापगढ़ के रहने वाले हैं। दोनों के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध चल रहा था।अलग-अलग समुदायों से ताल्लुक रखने के कारण दोनों के सामने कई सामाजिक और पारिवारिक चुनौतियां थीं। जब उन्हें लगा कि समाज और परिवार उनके इस रिश्ते को स्वीकार नहीं करेगा, तो दोनों ने आपसी सहमति से अपने भविष्य का फैसला खुद करने की ठानी।
अगस्त्य मुनि आश्रम में वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजा मंडप
अपने प्रेम को विवाह के पवित्र बंधन में बांधने के लिए दोनों ने बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम का रुख किया। आश्रम के मुख्य पुरोहितों ने पहले शाहजहां बानो की इच्छा और सहमति जानी। शाहजहां ने लिखित और मौखिक रूप से स्पष्ट किया कि वह बिना किसी डर, लालच या दबाव के अपनी स्वेच्छा से सनातन धर्म को स्वीकार कर रही हैं। इसके बाद धर्म परिवर्तन की जरूरी धार्मिक प्रक्रियाओं को पूरा किया गया। शुद्धिकरण अनुष्ठान के तहत शाहजहां बानो को पंचगव्य और गंगाजल ग्रहण कराया गया।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शाहजहां बानो की मांग में भरा सिंदूर
धर्म परिवर्तन के तुरंत बाद आश्रम परिसर में बने मंडप में विवाह की रस्में शुरू हुईं। वैदिक मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के बीच पवन यादव ने शाहजहां बानो की मांग में सिंदूर भरा और उन्हें विवाह का प्रतीक मंगलसूत्र पहनाया। इसके बाद दोनों ने जलती हुई पवित्र अग्नि को साक्षी मानकर उसके चारों ओर सात फेरे लिए और जीवन भर सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ निभाने का वचन दिया।
शाहजहां बानो बोली- सनातन धर्म और संस्कृति से हमेशा से था लगाव
विवाह की रस्में पूरी होने के बाद शाहजहां बानो ने अपने दिल की बात साझा की। उन्होंने कहा, “मुझे सनातन धर्म की परंपराएं, रीति-रिवाज और संस्कृति हमेशा से बहुत प्रभावित करती थीं। पवन के साथ आने के बाद मेरा यह विश्वास और दृढ़ हो गया। मैंने पूरी तरह होश-ओ-हवास में यह कदम उठाया है और मुझे इस फैसले पर बेहद गर्व है।” उन्होंने आगे कहा कि वह अब एक नए नाम और नई पहचान के साथ पवन कुमार यादव की अर्धांगिनी के रूप में अपनी नई गृहस्थी की शुरुआत करने जा रही हैं।
युगल ने कहा- बिना किसी दबाव के लिया फैसला, अब अपनी मर्जी से सनातनी रीति-रिवाज से जिएंगे जिंदगी
युगल ने कहा कि उन्होंने बिना किसी दबाव के प्रेम विवाह करने का फैसला लिया है और अब अपनी मर्जी से सनातनी रीति-रिवाज से जिंदगी जीना चाहते हैं। दूल्हे पवन कुमार यादव ने कहा, “हम दोनों एक-दूसरे के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं। शाहजहां ने मेरे और सनातनी संस्कृति के लिए जो बड़ा कदम उठाया है, मैं जीवन भर उसका सम्मान करूंगा और उसे हर खुशी देने का प्रयास करूंगा।”
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सुरक्षा और कानूनी प्रक्रियाओं पर ध्यान
इस प्रकार के अंतरधार्मिक प्रेम विवाहों में अक्सर पारिवारिक विरोध और सुरक्षा से जुड़े खतरे सामने आते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए नवविवाहित जोड़े ने आश्रम प्रबंधन के माध्यम से स्थानीय पुलिस प्रशासन को भी अपने विवाह और धर्म परिवर्तन के बारे में सूचित करने की औपचारिकताएं शुरू कर दी हैं। सूत्रों का कहना है कि दोनों बालिग हैं और कानूनन अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुनने का अधिकार रखते हैं। युगल ने स्थानीय प्रशासन से सुरक्षा की गुहार भी लगाई है ताकि उन्हें भविष्य में किसी भी प्रकार के पारिवारिक या सामाजिक आक्रोश का सामना न करना पड़े।
अगस्तय मुनि आश्रम में लिखित सहमति देने वाले बालिगों का ही कराया जाता है विवाह
बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम के पदाधिकारियों ने बताया कि आश्रम में केवल उन्हीं जोड़ों का विवाह संपन्न कराया जाता है जो पूरी तरह से बालिग होते हैं और अपनी स्वेच्छा से बिना किसी बाहरी दबाव के लिखित सहमति देते हैं। शाहजहां बानो और पवन कुमार यादव के मामले में भी सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बाद ही पूरी विधि-विधान से शादी कराई गई है। आश्रम प्रशासन ने नवदंपति को सुखी और मंगलमय दांपत्य जीवन का आशीर्वाद देकर विदा किया।

