Social Sharing icon

बीजिंग/नई दिल्ली। एशिया की भू-राजनीति में एक नया मोड़ सामने आ रहा है, जहां चीन अब सिर्फ आर्थिक ताकत के दम पर नहीं, बल्कि सुरक्षा साझेदारी के जरिए अपना प्रभाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। जापानी विश्लेषक Ken Moriyasu के मुताबिक चीन अब ‘2+2 सुरक्षा संवाद’ के जरिए भारत के पांच पड़ोसी देशों—Bangladesh, Nepal, Pakistan, Myanmar और Sri Lanka—में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। यह कदम एशिया में शक्ति संतुलन को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है और भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा सकता है।

चीन का ‘2+2 फॉर्मूला’: रक्षा और कूटनीति का संयुक्त दांव

चीन का ‘2+2 सुरक्षा संवाद’ ऐसा मॉडल है जिसमें दो देशों के विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री एक साथ बैठकर सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा करते हैं। यह फॉर्मेट पहले से United States द्वारा India, Japan और Australia जैसे देशों के साथ अपनाया जाता रहा है। अब चीन भी इसी मॉडल को अपनाकर अपने प्रभाव क्षेत्र को विस्तार देना चाहता है। चीन के विदेश मंत्री Wang Yi और रक्षा मंत्री Dong Jun इस रणनीति को आगे बढ़ाने में जुटे हैं।

मध्य एशिया से शुरुआत, दक्षिण एशिया अगला निशाना

चीन पहले इस मॉडल को Kazakhstan, Kyrgyzstan और Tajikistan जैसे मध्य एशियाई देशों के साथ लागू कर रहा है। Ken Moriyasu का कहना है कि Russia Ukraine War के बाद इस क्षेत्र में रूस का प्रभाव कमजोर हुआ है, जिसका फायदा चीन उठाना चाहता है। इन देशों की चिंता Afghanistan से फैलने वाली अस्थिरता, आतंकवाद और ड्रग तस्करी को लेकर है, और चीन इस मुद्दे को अपने प्रभाव विस्तार के अवसर के रूप में देख रहा है।

‘रणनीतिक प्लेटफॉर्म’ बनाकर एशिया में पकड़ मजबूत करने की कोशिश

चीन अब इस ‘2+2 संवाद’ को सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि इसे एक स्थायी ‘रणनीतिक प्लेटफॉर्म’ के रूप में विकसित करने की योजना है। हाल ही में Cambodia के साथ हुए पहले 2+2 संवाद में Wang Yi ने ‘एशियाई सुरक्षा मॉडल’ की बात कही, जो पश्चिमी देशों के प्रभाव को संतुलित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

भारत के पड़ोस में बढ़ती हलचल, क्यों बढ़ी चिंता?

चीन की यह रणनीति सीधे तौर पर India के रणनीतिक दायरे को प्रभावित कर सकती है। जिन देशों पर चीन की नजर है, वे सभी भारत के पड़ोसी हैं और पहले से ही चीन के साथ आर्थिक या सैन्य सहयोग रखते हैं—खासतौर पर Pakistan में चल रहा CPEC प्रोजेक्ट इसका बड़ा उदाहरण है। अगर इन देशों के साथ चीन सुरक्षा समझौते करता है, तो यह भारत के लिए ‘रणनीतिक घेराबंदी’ जैसी स्थिति पैदा कर सकता है।

बदलती वैश्विक रणनीति: क्या गठबंधन की ओर बढ़ रहा है चीन?

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह कदम उसकी पुरानी नीति—‘सैन्य गठबंधन से दूरी’—से अलग नजर आता है। अब वह अप्रत्यक्ष रूप से ऐसे मंच बना रहा है जो गठबंधन जैसे ही प्रभाव पैदा करते हैं। यह न केवल एशिया बल्कि पूरे यूरेशिया में शक्ति संतुलन को बदल सकता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि भारत और उसके सहयोगी देश इस चुनौती का जवाब कैसे देते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *