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राजस्थान/जयपुर। राजस्थान में सरकारी नौकरियों पर ‘जुगाड़ और जालसाजी’ के सहारे कब्जा करने वालों के खिलाफ स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने बड़ा शिकंजा कस दिया है। लेक्चरर भर्ती-2022 और शिक्षक भर्ती में फर्जी डिग्री और नकली स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट के जरिए सिस्टम को चूना लगाने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। दो बड़ी गिरफ्तारियों ने यह साबित कर दिया है कि प्रदेश में ‘कागजी खिलाड़ी’ और ‘फर्जी डिग्रीधारी’ किस तरह मेहनती अभ्यर्थियों का हक मार रहे थे।

शादी के पंडाल में बिक गया ‘नेशनल खिलाड़ी’ का तमगा

SOG की जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि आरोपी जगदीश सारण, जो शिक्षा विभाग में सस्पेंडेड क्लर्क है, ‘नेशनल खिलाड़ी’ बनाने का कारोबार खुलेआम चला रहा था। जांच में सामने आया कि बीकानेर के एक शादी समारोह में ही अभ्यर्थी से डील फाइनल हुई। तायक्वांडो के नेशनल लेवल सर्टिफिकेट के नाम पर पहले 2.30 लाख रुपये की डील तय हुई, लेकिन बाद में 30 हजार रुपये में ही ‘नेशनल खिलाड़ी’ का तमगा दे दिया गया।

तायक्वांडो चैंपियनशिप के नाम पर फर्जी सर्टिफिकेट

आरोपी ने विशाखापत्तनम में आयोजित कथित नेशनल तायक्वांडो चैंपियनशिप का फर्जी सर्टिफिकेट तैयार कराया। इस एक कागज के दम पर अभ्यर्थी शिक्षक भर्ती-2022 में 2% स्पोर्ट्स कोटे का फायदा उठाना चाहता था। जगदीश अपने एक पीटीआई रिश्तेदार के जरिए इन फर्जी दस्तावेजों का नेटवर्क चलाता था। पुलिस अब इस पूरे सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।

यूनिवर्सिटी के नाम पर ‘डिग्री फैक्ट्री’, MA तक बिक रही थी

दूसरा मामला और भी गंभीर है। आरोपी ध्वज कीर्ति शर्मा ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी के नाम पर फर्जी MA (हिंदी) की डिग्री, मार्कशीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट तक तैयार कर दिए। अभ्यर्थी कमला कुमारी को लेक्चरर भर्ती-2022 में चयन दिलाने के लिए पूरे दस्तावेज ऐसे बनाए गए कि वे असली जैसे लगें। मुहरें, हस्ताक्षर और फॉर्मेट तक हूबहू कॉपी किए गए थे।

RPSC की जांच में खुला खेल, अंदरूनी मिलीभगत के संकेत

जब राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने दस्तावेजों की गहन जांच की, तब इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यूनिवर्सिटी के कुछ अंदरूनी कर्मचारी भी इस रैकेट में शामिल हो सकते हैं। SOG ने ध्वज कीर्ति शर्मा को प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस गिरोह के और बड़े चेहरे बेनकाब होंगे।

SOG की ‘क्लीनअप ड्राइव’, शिक्षा सिस्टम का काला सच उजागर

एडीजी (SOG) विशाल बंसल के नेतृत्व में चल रही इस कार्रवाई ने शिक्षा व्यवस्था में गहराई तक फैले भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है। एक तरफ वे छात्र हैं जो वर्षों तक मेहनत कर परीक्षा पास करने का सपना देखते हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसे ‘दलाल’ हैं जो पैसे लेकर अयोग्य लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का रास्ता बना देते हैं।

20 से ज्यादा अभ्यर्थी गिरफ्तार, बड़ा गिरोह सक्रिय

तायक्वांडो फर्जी सर्टिफिकेट मामले में अब तक 20 से अधिक अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इससे साफ है कि यह कोई छोटा अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह का हिस्सा है। SOG की यह कार्रवाई उन हजारों ईमानदार युवाओं के लिए राहत की खबर है, जिनका हक ये ‘फर्जी खिलाड़ी’ और ‘डिग्रीधारी’ छीन रहे थे।

सिस्टम पर बड़ा सवाल: क्या ऐसे ही बिकती रहेंगी नौकरियां?

यह पूरा मामला कई बड़े सवाल खड़े करता है—

  • क्या सरकारी नौकरियां अब पैसे के दम पर खरीदी जाएंगी?
  • क्या यूनिवर्सिटी और भर्ती एजेंसियों की सुरक्षा इतनी कमजोर है?
  • क्या मेहनत करने वाले युवाओं के साथ यह अन्याय यूं ही चलता रहेगा?

SOG की इस कार्रवाई ने फिलहाल इस काले कारोबार पर बड़ा वार किया है, लेकिन असली चुनौती इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की है।

ईमानदार अभ्यर्थियों के लिए उम्मीद की किरण

इस कार्रवाई को उन लाखों युवाओं के लिए ‘संजीवनी’ माना जा रहा है, जो अपनी मेहनत और योग्यता के दम पर नौकरी पाना चाहते हैं। अगर इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रही, तो आने वाले समय में भर्ती प्रक्रिया और ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बन सकती है।

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